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शादी से दूर क्यों भाग रही जेनरेशन जेड? जानें वजह

कुछ सालों पहले तक पढ़ाई खत्म होते ही शादी के बंधन में बंध जाना ही समाज का अंतिम नियम माना जाता था। मगर आज के युवा इस ढर्रे को तोड़ रहे हैं। वे शादी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि बिना किसी तैयारी के इस बड़े रिश्ते में कूदने से कतरा रहे हैं।

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आजकल के लड़के-लड़कियां उम्र का आंकड़ा देखकर नहीं, बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तैयार होने के बाद ही सात फेरे लेना चाहते हैं। वे सामाजिक दबाव में आकर किसी समझौते वाले रिश्ते का हिस्सा बनने के बजाय थोड़ा ठहरना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं।

करियर और पहचान बनाना पहली जरूरत

आज की जनरेशन सबसे पहले अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती है। वे अपनी एक मजबूत प्रोफेशनल पहचान बनाने के लिए पूरी तरह गंभीर हैं:

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  • सपनों को उड़ान देना: युवा सबसे पहले एक बेहतरीन और सुरक्षित नौकरी हासिल करने पर अपना पूरा ध्यान लगा रहे हैं।

  • हायर एजुकेशन पर फोकस: उच्च शिक्षा और नई-नई स्किल्स (कौशल) सीखने की चाहत ने युवाओं की प्राथमिकताएं बदल दी हैं।

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  • आत्मनिर्भरता का सुख: दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद के पैसों से अपनी जरूरतें पूरी करना आज के युवाओं का मुख्य लक्ष्य है।

आर्थिक मजबूती के बिना कदम बढ़ाना नामुमकिन

आज के दौर में महंगाई और बदलती लाइफस्टाइल ने युवाओं को ज्यादा व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) बना दिया है। वे शादी से पहले इन आर्थिक पहलुओं को मजबूती देना चाहते हैं:

  • भविष्य का ठिकाना: शादी के खर्चे उठाने से पहले युवा अपना खुद का एक घर खरीदने या अच्छी सेविंग्स करने के बारे में सोचते हैं।

  • जिम्मेदारियों का अहसास: वे जानते हैं कि शादी के बाद खर्चे बढ़ेंगे, इसलिए वे पहले से ही मजबूत वित्तीय सुरक्षा चक्र तैयार करना चाहते हैं।

व्यक्तिगत आजादी और खुद के फैसले सर्वोपरि

आज के युवा अपनी पर्सनल फ्रीडम (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) से कोई समझौता नहीं करना चाहते। वे सामाजिक बेड़ियों में बंधने के बजाय बिना किसी रोक-टोक के अपनी मर्जी से खुलकर जीना चाहते हैं। उन्हें दुनिया घूमना, नए अनुभव बटोरना और अपने शौक पूरे करना बहुत पसंद है।

मानसिक सुकून और सही हमसफर की तलाश

इस पीढ़ी के लिए मानसिक शांति सबसे बढ़कर है। वे किसी भी तरह के टॉक्सिक (जहरीले) रिश्ते में घुटने के बजाय अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं। उनके लिए शादी की बुनियाद में आपसी सम्मान, बराबर की सोच, अटूट भरोसा और जीवन के लक्ष्यों का मिलना सबसे ज्यादा मायने रखता है।

डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया की नई परिभाषा

इंटरनेट और सोशल मीडिया ने युवाओं को दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियों और जीने के तरीकों से रूबरू कराया है। इससे उनकी सोच का दायरा बढ़ा है। अब वे रिश्तों में बराबरी, खुलकर बातचीत करने की आजादी और एक-दूसरे के पर्सनल स्पेस का सम्मान करने जैसी बातों को बहुत जरूरी मानते हैं।

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