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उज्जैन : डॉक्टर्स चिंतित: डेंगू से अस्पतालों में बेड फुल

गलियारे में लगाना पड़ रहे बेड, ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर बन सकती है मुसीबत

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.उज्जैन। शहर के डॉक्टर्स के समक्ष एक यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है। चिंता है डेंगू+कोरोना को लेकर। अभी शहर में डेंगू जोरों पर है। ऐसे में कोरोना संक्रमण का शिकार मरीज हो गया तो स्थितियां और अधिक गंभीर हो जाएगी। जिला अस्पताल एवं माधवनगर सहित शहर का कोई भी प्रायवेट हॉस्पिटल इस समय ऐसा नहीं है, जहां डेंगू से पीडि़त मरीज भर्ती न हो। हालात यह है कि फ्रीगंज के कुछ प्रायवेट हॉस्पिटल में बरामदे में पलंग लगा दिए गए हैं।

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डेंगू के मरीज में प्लेटलेट्स तेजी से कम होते हैं। यही कारण है कि प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज एवं पुष्पा मिशन हॉस्पिटल में लोग रक्तदान करने पहुंच रहे हैं,ताकि अपने मरीज के लिए प्लेटलेट्स का इंतजाम कर सकें। डॉक्टर्स के अनुसार इन मरीजों का उपचार करना कोई बड़ी बात नहीं है। चिंता यह है कि यदि कोरोना की तीसरी लहर आ गई या उज्जैन में संक्रमण फेल गया तो क्या होगा ?

यह है सुझाव
डॉ.वैद्य के अनुसार जिला प्रशासन को अत्यधिक सावधानी रखना होगी। मच्छरों को नष्ट करने की दिशा में सफाई से लेकर दवा का छिड़काव करने पर जोर देना होगा। वहीं युद्ध स्तर पर यह प्रयास करना होंगे कि अब शहर में कोरोना का नया मरीज न आए। त्योहार के बीच बाजार में लोग कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करें।

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डॉ.सोनानिया के अनुसार बाजार में भीड़ अत्यधिक बढ़ी है। कोविड प्रोटोकाल का कोई पालन नहीं कर रहा है। न तो दुकानदार और न ही खरीददार। ऐसे में संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। लोग मास्क तक नहीं लगा रहे हैं। इस संक्रमण से सबसे अधिक नुकसान होगा डेंगू और वायरल फीवर से पीडि़त या ठीक हो चुके मरीजों का, जिनकी इम्युनिटी एकदम से कम हो गई है। कोरोना का संंक्रमण वैसे भी कम इम्युनिटीवालों को सबसे पहले होता है।
हम मुहिम चलाएंगे- सीएमएचओ

हम मुहिम चलाएंगे- सीएमएचओ
सीएमएचओ डॉ.संजय शर्मा के अनुसार शुक्रवार को उन्होने स्वास्थ्य अमले की बैठक ली है। हम मलेरिया विभाग के माध्यम से दवाई छिड़काव एवं सर्वे की मुहिम चलाएंगे।

देखिये…क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज में कोरोना की दोनों लहरों के समय नोडल अधिकारी रहे डॉ.सुधाकर वैद्य के अनुसार इस समय डेंगू और वायरल फीवर के मरीजों से वार्ड भरे हुए हैं। इन मरीजों की इम्युनिटी तेजी से गिरती है और ये इतना कमजोर हो जाते हैं कि 8 से 10 दिन तक बेड रेस्ट पर रहते हैं । ऐसे में यदि कोरोना का संक्रमण इन्हें हो गया तो ऐसे मरीजों का भगवान ही मालिक है। उनके अनुसार दो माह लगेंगे इस रोग को जाने में।

कोरोना का उज्जैन जिले में सर्वप्रथम उपचार करने वाले माधवनगर हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. एचपी सोनानिया के अनुसार आने वाला समय बहुत ही तनावभरा हो सकता है। इस समय सरकारी में कम लेकिन प्रायवेट हॉस्पिटल में डेंगू तथा वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मरीजों की संख्या इतनी है की सभी जगह बेड फुल होते जा रहे हैं। ऐसे में यदि कोरोना संकमण ने पैर पसार लिए और कोरोना के मरीजों के लिए अस्पताल में जगह नहीं हुई तो क्या होगा ? यह विचार ही आंखों के सामने एक भयावह स्थिति दिखाता है।

ब्लैक फंगस नहीं है काबू में, सप्ताह में दो केस पहुंच रहे आरडी गार्डी

उज्जैन। कोरोना की दूसरी लहर के बाद ब्लैक फंगस ने तेजी से पैर पसारे थे। यह रोग अभी भी पीछा नहीं छोड़ रहा है। आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज में सप्ताह में कम से कम दो केस इस रोग के पहुंच रहे हैं। कॉलेज के इएनटी विभाग प्रमुख डॉ.सुधाकर वैद्य के अनुसार अभी भी हर सप्ताह कम से कम दो मरीज ब्लेक फंगस के आ रहे हैं और भर्ती होकर उपचार करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोविड पीडि़तों को कब क्या होगा, यह कहना मुश्किल है।

ऐसा इसलिए क्योंकि जो लोग ठीक थे, सब कुछ अच्छा चल रहा था। उन्हें अचानक से शुगर बढ़ रही है। बढ़ी हुई शुगर के बीच ब्लैक फंगस की बीमारी हो रही है। पिछले दो माह से आ रहे मामलों में यह देखने में आ रहा है कि मरीज को ऑक्सीजन भी नहीं लगी थी। स्टेराइड दिया गया था, इसलिए शुगर बढ़ी और वे ब्लेक फंगस के शिकार हो गए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन्हें भी कोविड हुआ था, वे अपनी शुगर का लेवल हमेशा जांचें और सावधानी बरतें, ताकि कोई अन्य रोग न घेर ले।

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