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उज्जैन:आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं थे पाटीदार अस्पताल में

एसडीएम, सीएसपी सहित 4 अधिकारियों की टीम करेगी हादसे की जांच

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उज्जैन।रविवार को जीरोपाइंट ब्रिज के पास स्थित पाटीदार अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बने कोरोना मरीजों के आइसोलेशन वार्ड में अज्ञात कारणों के चलते आग लग गई थी। आग भयावह होने की वजह से मरीजों और उनके परिजनों में अफरा तफरी मची, चार मरीज झुलस गये। फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। पूरे घटनाक्रम में एक बात स्पष्ट हुई कि अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं थे और जो थे वह भी खराब पड़े हुए थे। कलेक्टर द्वारा पूरी घटना की जांच के लिये एसडीएम, सीएसपी सहित 4 अधिकारियों की टीम बनाई है जो जांच के बाद रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी।


पाटीदार अस्पताल प्रबंधन द्वारा माधव नगर पुलिस को एक पत्र दिया गया है जिसमें उल्लेख है कि अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शार्ट सर्किट के कारण आग लगी थी जिससे अफरा तफरी मची। इस वार्ड में कोरोना मरीज भर्ती थे। प्रत्यक्षदर्शी इंस्पेक्टर श्रीवास्तव ने बताया कि जैसे ही वार्ड में आग लगी स्टाफ के लोग मरीजों को अपने हाल पर छोड़कर भाग गये थे। उनकी मां और पत्नी वार्ड में भर्ती थी। मां आग से झुलसी जिनका इंदौर में उपचार जारी है। आग पर काबू पाने के साथ ही मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कर दिया गया। वर्तमान में पाटीदार अस्पताल में कोई मरीज उपचाररत नहीं है। आगजनी वाले आइसोलेशन वार्ड को सील कर दिया गया है। अब यहां पर कलेक्टर द्वारा बनाई गई जांच टीम एसडीएम दुबे, सीएसपी माधव नगर, फायर अधिकारी और एफएसएल अधिकारी जांच करेंगे जिसकी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जायेगी।

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लाखों की आबादी में एक फायर ऑफिसर भी नहीं

संकरे मार्गों के लिये खरीदी फायर बाइक वर्षों से खराब पड़ी

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उज्जैन। यह शहर का दुर्भाग्य ही है कि लाखों की आबादी में एक फायर ऑफिसर भी नहीं है जो आगजनी की बड़ी घटना के समय योजनाबद्ध तरीके से आग बुझाने की योजना बना पाये। नगर निगम के फायर ब्रिगेड में वर्तमान में एक फायर ऑफिसर है जो संविदा पर कार्यरत हैं। सिंहस्थ 2016 के पूर्व नगर निगम द्वारा लाखों रुपये कीमत की दो फायर बाइक खरीदी गई थी। इसके पीछे उद्देश्य था कि संकरे मार्गों पर उक्त बाइकों को भेजकर तुरंत आग बुझाने के प्रयास शुरू किये जा सकें, लेकिन यह बाइकें वर्षों से खराब हालत में फायर ब्रिगेड परिसर में धूल खा रही हैं। फायर ब्रिगेड में एक फायर ऑफिसर हैं जो संविदा पर कार्यरत हैं। नगर निगम मुख्यालय के पास स्थित फायर ब्रिगेड के मुख्य स्टेशन के अलावा शहर में मक्सीरोड़ उद्योगपुरी, नानाखेड़ा बस स्टेण्ड और महाकाल मंदिर परिसर में सब फायर स्टेशन भी हैं। आबादी और क्षेत्रफल के मान से फायर ब्रिगेड का सब स्टेशन बनाकर विस्तार तो किया गया लेकिन एक स्थायी फायर ऑफिसर अब तक नियुक्त नहीं हो पाए।

दिखाने के लिये लगे थे अग्निशमन यंत्र

चार मंजिला पाटीदार अस्पताल में रविवार को कुल 80 मरीज भर्ती होकर उपचार करा रहे थे। इनके परिजन भी अस्पताल में थे। दोपहर 12 बजे अस्पताल में आग लगी जिसे बुझाने के लिये अग्निशमन यंत्र की तलाश शुरू की। अस्पताल में 4-5 यंत्र ही उपलब्ध थे जिनसे आग पर काबू नहीं हो पाया। इसके अलावा हाईडेंट लाइन तो लगाई थी लेकिन वह भी बंद थी इस कारण फायर ब्रिगेड की दमकल आने तक आग ने भयावह रूप धारण किया।

यह संसाधन होना जरूरी

फायर एक्सपर्ट ने चर्चा में बताया कि बहुमंजिला इमारतें हो या अस्पताल उनमें आग बुझाने के यंत्रों के अलावा अन्य संसाधन भी होना जरूरी होता है जिनका समय समय पर रख रखाव करना पड़ता है। पाटीदार अस्पताल में आटोमैटिक मॉड्यूलर, फायर बॉल, हाईडेंट लाइन, सीओ-2 यंत्र, होजरिल ड्रम आदि उपलब्ध नहीं थे जबकि अग्निशमन यंत्रों की संख्या 60 होना थी लेकिन अस्पताल में मात्र 4-5 यंत्र ही उपलब्ध थे।

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