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पाश्र्वनाथ डेवलपर्स दिवालिया, बिना रजिस्ट्री वाले प्लॉटधारी अब पड़ सकते हैं मुश्किल में

पार्श्वनाथ सिटी रहवासी समिति ने जारी की गाइड लाइन

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27 मई तक दावा करें वरना होगी मुश्किल

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नई दिल्ली की प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनी पाश्र्वनाथ डेवलपर्स के खिलाफ इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड (आईबीबीआई) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़ी कानूनी कार्रवाई के बाद कंपनी की देश भर में स्थित सभी चल-अचल संपत्तियां अब सीधे एनसीएलटी के नियंत्रण में आ गई हैं। इस घटनाक्रम के बाद उज्जैन की पार्श्वनाथ सिटी के उन प्लॉट धारकों में खलबली मच गई है, जिन्होंने प्लॉट तो बुक कर रखे हैं लेकिन अब तक उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। पार्श्वनाथ सिटी रहवासी समिति ने ऐसे सभी प्रभावित लोगों के लिए अलर्ट जारी करते हुए 27 मई तक हर हाल में अपना दावा प्रस्तुत करने की अपील की है।

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पार्श्वनाथ सिटी रहवासी समिति के अध्यक्ष मनीष शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिन लोगों ने प्लॉट के लिए केवल डेवलपर्स के साथ एग्रीमेंट (अनुबंध) कर रखा है और पूरी राशि देने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं करा पाए हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया बेहद नाजुक और अहम है। यदि तय समय सीमा यानी 27 मई के भीतर एनसीएलटी के समक्ष आधिकारिक दावा पेश नहीं किया गया, तो भविष्य में मालिकाना हक को लेकर बड़ी कानूनी अड़चन आ सकती है।

घर बैठे वेबसाइट पर ऐसे प्रस्तुत करें अपना दावा

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अध्यक्ष शर्मा के अनुसार, प्रभावित प्लॉट धारकों की सुविधा के लिए दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और बेहद सामान्य रखा गया है। सबसे पहले पाश्र्वनाथ डेवलपर्स की आधिकारिक वेबसाइट www.parshvnath.com पर लॉग इन करें। होम पेज पर एनसीएलटी क्लेम से संबंधित दी गई विशेष लिंक पर क्लिक करें। अपने प्लॉट बुकिंग, भुगतान रसीद और एग्रीमेंट से जुड़े आवश्यक कानूनी दस्तावेज वहां अपलोड करें। इसके बाद एनसीएलटी प्राप्त सभी दावों की जांच कर उन पर अपना अंतिम निर्णय लेगा।

दावा खारिज होने पर कोर्ट जाने का रहेगा विकल्प
रहवासी समिति ने प्लॉट धारकों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि यदि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान किसी प्लॉट धारक का दावा एनसीएलटी द्वारा किन्हीं तकनीकी कारणों से अस्वीकार (रिजेक्ट) कर दिया जाता है, तो भी उनके रास्ते बंद नहीं होंगे। पीडि़तों के पास न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय जाने का विकल्प खुला रहेगा। अध्यक्ष ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया के संबंध में किसी भी प्रकार की सामान्य जानकारी, फॉर्म भरने में आ रही दिक्कत या मार्गदर्शन के लिए प्लॉट धारक सीधे रहवासी समिति के पदाधिकारियों से मदद ले सकते हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला

डेवलपर्स पर 462 करोड़ रु. बकाया

अध्यक्ष ने बताया दिल्ली की पाश्वनार्थ डेवलपर्स पर विभिन्न बैंक और फायनेंस कंपनियों का करीब ४६२ करोड़ रुपए बकाया है। जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिवालिया की कार्रवाई की है। हालांकि 25 मई को मामले में सुनवाई है जिसमें कंपनी अपनी देनदारी चुकाने की प्लानिंग कोर्ट में पेश करेगी। अगर कोर्ट उससे सहमत हुई तो राहत भी मिल सकती है।

पार्श्वनाथ सिटी के कई प्लॉट बिना रजिस्ट्री के
गौरतलब है कि पार्श्वनाथ  डेवलपर्स ने 2007 में देवास रोड नागझिरी के पास पार्श्वनाथ सिटी कॉलोनी डेवलप की थी। यहां कुल 1100 प्लॉट हैं जिसमें से 350पर मकान बन चुके हैं और लोग रह रहे हैं। शेष 750 प्लॉट अभी खाली हैं और इन खाली प्लॉट में से अधिकतर ऐसे हैं जिनका सौदा सिर्फ एग्रीमेंट पर हुआ है, रजिस्ट्री नहीं हुई है। कोर्ट में इन्होंने दावा नहीं किया तो संपत्ति पर मुश्किल हो सकती है।

बंधक प्लॉट पर भी दावा करेगी समिति
पार्श्वनाथ सिटी के कुछ प्लॉट नगर निगम में बंधक है। उस पर भी समिति दावा करेगी ताकि उनके बदले वे यहां विद्युत ग्रिड लगवा सकें। ग्रिड के बिना कॉलोनी में कमर्शियल रेट पर बिजली मिल रही है। जिसका घरेलु रेट के आधार पर बिल रहवासी चुकाते हैं और डिफरेंश अमाउंट डेवलपर्स कंपनी चुकाती है। यह डिफरेंश हर महीने ५ से ६ लाख रुपए का होता है। अगर कंपनी की संपत्ति कोर्ट के अधीन जाती है तो इस राशि का भार भी रहवासियों पर पड़ सकता है। इस कारण समिति बंधक प्लॉट के जरिए बिजली ग्रिड लगाने की मांग उठाएगी।

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