रिजल्ट के डर ने छीन ली 10वीं छात्रा की जिंदगी

फांसी लगाकर दी जान पेपर बिगडऩे से थी डिप्रेशन में

अक्षरविश्व न्यूज इंदौर। विजय नगर क्षेत्र में परीक्षा के तनाव और परिणाम की चिंता ने एक और हंसती-खेलती जिंदगी को खामोश कर दिया। प्रकाशचंद सेठी नगर में रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा पलक कश्यप ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने जब सुबह पलक का शव पंखे से लटका देखा, तो घर में कोहराम मच गया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन शुरुआती जांच में मामला पढ़ाई और रिजल्ट के दबाव का नजर आ रहा है।
विजय नगर पुलिस के अनुसार, पलक के पिता जितेंद्र कश्यप पेशे से वेल्डर हैं। पलक ने इस साल 10वीं की परीक्षा प्राइवेट फॉर्म भरकर दी थी। पिता ने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि परीक्षा देने के बाद से ही पलक काफी परेशान थी। उसने अपनी बहनों से साझा किया था कि उसके कुछ पेपर बिगड़ गए हैं और उसे डर है कि वह फेल हो जाएगी।
परिजनों के मुताबिक, आत्महत्या से ठीक एक दिन पहले पलक ने अपनी बहन से रिजल्ट आने की बात कही थी। वह परिणाम को लेकर गहरे तनाव (डिप्रेशन) में थी। उसे लग रहा था कि मेहनत के बावजूद नतीजा पक्ष में नहीं आएगा। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे जब परिवार के सदस्य जगे, तो उन्होंने पलक को कमरे में फंदे पर झूलते पाया।
सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा है। हालांकि पुलिस प्रथम दृष्टया इसे पढ़ाई के तनाव से जुड़ा सुसाइड मान रही है, लेकिन जांच अधिकारी अन्य संभावित कारणों (एंगल) को भी खंगाल रहे हैं ताकि मौत की असल वजह स्पष्ट हो सके। पलक अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर की थी।
संदेश… एक मार्कशीट आपका भविष्य तय नहीं करती
असफलता स्थायी नहीं है: 10वीं या 12वीं की परीक्षा में कम अंक आना या फेल होना जीवन का अंत नहीं है। सप्लीमेंट्री और ‘रुक जाना नहीं’ जैसी कई योजनाएं दोबारा अवसर देती हैं।
मन की बात साझा करें: यदि आपको डर लग रहा है या घबराहट हो रही है, तो उसे मन में दबाने के बजाय दोस्तों, बड़े भाई-बहन या माता-पिता को जरूर बताएं।
विकल्प खुले रखें: आज के समय में करियर के हजारों विकल्प मौजूद हैं जहां किताबी नंबरों से ज्यादा हुनर की कद्र होती है।









