हाइपर टेंशन दिवस : खराब जीवन शैली से बना साइलेंट किलर

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मौजूदा दौर में अपनाई जा रही खराब जीवनशैली के कारण लोग उच्च रक्तदाब (हाइपर टेंशन) के शिकार हो रहे हैं। हाल यह है कि आईसीयू में आने वाले हर दस मरीज में से 8 हाइपर टेंशन के होते हैं। यह साइलेंट किलर बनता जा रहा है। इसकी वजह से हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और पैरालिसिस का खतरा बना रहता है। सामान्य तौर पर मनुष्य का बीपी 80/140 होना चाहिए। अगर यह इससे ज्यादा है तो वह हाइपर टेंशन है। खान-पान पर ध्यान और आदतों में बदलाव से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह कहना है शहर के प्रमुख डॉक्टरों का।
क्या है हाइपर टेंशन- इसमें मनुष्य का रक्तचाप बढ़ जाता है। यह घातक हो सकता है।
क्यों होता है- अधिक नमक का सेवन, जंक फूड, खराब नींद और आलस्य।
कैसे बचें- नमक का सेवन कम करें। जंक फूड (ब्रेड, समोसा, कचौरी, पैकेटबंद चिप्स) बंद करें। धूम्रपान नहीं करें। मोटापे पर नियंत्रण रखें। अच्छी नींद लें। योगा और व्यायाम करें। हरी सब्जी और फल का सेवन ज्यादा करें। कब्ज बिल्कुल ना होने दें। हो सके तो रोजाना कम से कम 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक (तेज गति से चलना) करें।
यह सावधानी रखें- हाइपर टेंशन की स्थिति में बीपी दोनों हाथ का नपवाएं। बीपी पेशाब करने के बाद नपवाएं। मोटे कपड़े पहनकर बीपी नहीं नपवाएं। बीपी नपवाते समय पैर नीचे हो।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सेम्स इंदौर के सीनियर एडिशनल प्रोफेसर डॉ. विजय गर्ग कहते हैं कि हाइपर टेंशन से बचाव का एकमात्र साधन सावधानी है। खान-पान में तो सावधानी रखें ही, समय-समय पर जांचें भी जरूर करवाएं। इनमें यूरिन, शुगर, कोलेस्ट्रोल, ईसीजी, सीरम केट्रेनिन और रेटिना की जांच प्रमुख है। हर साल यह जांच कम से कम एक बार जरूर करवाना चाहिए।
आयुर्वेद कॉलेज उज्जैन के एमडी डॉ. जितेंद्र जैन कहते हैं कि डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत में 28.1 प्रतिशत एडल्ट हाइपर टेंशन के मरीज हैं। इसका मूल कारण खराब जीवनशैली है। सिर के पीछे, गर्दन में दर्द और थोड़े से परिश्रम से थकावट इसके लक्षण हैं। सीने में दर्द, आंखों से देखने में होने वाली परेशानी भी हाइपर टेंशन का संकेत है। मोटापे और डायबिटीक लोगों के लिए यह बहुत घातक है। इन लोगों को नियमित बीपी चैकअप कराते रहना चाहिए।









