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इतिहास में पहली बार ₹96.35 पर पहुंचा रुपया, जानें गिरावट की वजह

रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 54 पैसे कमजोर होकर अब तक के सबसे निचले स्तर 96.35 रुपये प्रति डॉलर (अस्थायी) पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितताओं और डॉलर की मजबूती के चलते भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है।

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विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। वहीं कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.19 रुपये प्रति डॉलर पर खुला था। कारोबार के दौरान यह और गिरकर 96.39 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। दिन के अंत में रुपया 96.35 रुपये प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से 54 पैसे की कमजोरी दर्शाता है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया पहली बार 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के नीचे फिसल गया था और 95.81 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी भारतीय मुद्रा की चाल को प्रभावित कर रही हैं। जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 96 रुपये से 96.60 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकता है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप और सोने-चांदी के आयात पर लगाए गए कुछ प्रतिबंध निचले स्तर पर रुपये को थोड़ी राहत दे सकते हैं।

दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.14 प्रतिशत गिरकर 99.14 पर पहुंच गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.65 प्रतिशत बढ़कर 109.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार दूसरे कारोारी सत्र में खरीदारी करते नजर आए और उन्होंने शुक्रवार को 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक आठ मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.29 अरब डॉलर बढ़कर 696.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 7.79 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 690.69 अरब डॉलर रह गया था।

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