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एयर इंडिया और इंडिगो ने घटाईं उड़ानें, यात्रियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

एअर इंडिया ने घटाईं उड़ानें, यात्रियों की जेब पर पड़ेगी मार!

टाटा ग्रुप की एयरलाइन एअर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में 22 प्रतिशत की कटौती का फैसला किया है। यह बदलाव जून से अगस्त 2026 के बीच लागू रहेगा। जेट फ्यूल की आसमान छूती कीमतें इस फैसले की मुख्य वजह बताई जा रही हैं। खबरों के मुताबिक इंडिगो भी अपनी घरेलू उड़ानों में 5 से 7 प्रतिशत की कटौती कर सकती है।

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4400 साप्ताहिक उड़ानों पर पड़ेगा असर

एअर इंडिया फिलहाल हर हफ्ते करीब 4400 उड़ानें संचालित करती है। इनमें लगभग 3600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। घरेलू कटौती से पहले एयरलाइन 23 अंतरराष्ट्रीय रूट पर उड़ानें 27 प्रतिशत घटा चुकी है और 6 रूट पर फ्लाइटें पूरी तरह रद्द कर चुकी है।

एअर इंडिया का कहना है कि बाजार की स्थिति और परिचालन हालात पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, उड़ानें फिर से बहाल की जाएंगी।

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युद्ध और महंगे फ्यूल ने बिगाड़ा हिसाब

28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने जेट फ्यूल की कीमतों में भारी इजाफा किया है। ईरानी हवाई क्षेत्र से परहेज के कारण अंतरराष्ट्रीय रूट लंबे हो गए हैं। पाकिस्तानी एयरस्पेस पर पाबंदियों ने भी परिचालन लागत और बढ़ा दी है।

फ्यूल खर्च 40 से बढ़कर 60 प्रतिशत हुआ

इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में फ्यूल की हिस्सेदारी पहले 40 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों सेक्टरों में एयरलाइंस का नेटवर्क वित्तीय रूप से दबाव में आ गया है।

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मार्च-अप्रैल में भी गिरे आंकड़े

एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम के मुताबिक मार्च और अप्रैल में भारत की चार बड़ी एयरलाइंस के परिचालन में पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत की गिरावट आई। इस दौरान इंडिगो ने 4.5 प्रतिशत और एअर इंडिया ने 7.5 प्रतिशत कम उड़ानें भरीं। एअर इंडिया की बजट शाखा एअर इंडिया एक्सप्रेस सबसे ज्यादा प्रभावित रही, जहां 17.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

यात्रियों की जेब पर सीधा असर

बढ़ती लागत का बोझ एयरलाइंस ने यात्रियों पर डाल दिया है। हवाई किराए महंगे होने से घरेलू यात्रा की मांग में कमी आई है। भारत के घरेलू बाजार में इंडिगो और एअर इंडिया का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा है। इस बीच अकासा एयर छोटे बेड़े के बावजूद तेजी से विस्तार की कोशिश में जुटी है।

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