Tuesday, November 29, 2022
Homeधर्मं/ज्योतिषकब है विवाह पंचमी जानें, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

कब है विवाह पंचमी जानें, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व

विवाह पंचमी इस साल 28 नवंबर 2022 को है. मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन विवाह पंचमी मनाई जाती है. ये दिन हिंदुओं के लिए बहुत मायने रखता है, क्योंकि इस पावन तिथि पर भगवान राम और माता सीता विवाह के बंधन में बंधे थे.

कहते हैं कि जो इस दिन राम और सीता का विवाह अनुष्ठान, पूजा पाठ, करता है उनके दांपत्य जीवन की हर परेशानियों से राहत मिलती है. कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखकर सीता-राम की आराधना करती हैं. ये दिन वैसे तो बहुत शुभ है लेकिन इस दिन शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य करना वर्जित हैं. आइए जानते हैं क्यों.

तिथि और शुभ मुहूर्त

  • विवाह पंचमी तिथि- 28 नवंबर, सोमवार
  • पंचमी तिथि की शुरुआत- 27 नवंबर को शाम 4 बजकर 25 मिनट पर
  • पंचमी तिथि समाप्त- 28 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट पर

विवाह पंचमी का महत्व

ऐसी मान्यता है कि विवाह पंचमी के दिन माता सीता और श्री राम की विधि-विधान से पूजा करने से विवाह में आने वाली सारी बाधाएं दूर होती हैं. कुंवारी कन्या यदि पूरे मन से सीता-राम की पूजा करती हैं तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है. इस दिन अनुष्ठान कराने से विवाहित लोगों का दांपत्य जीवन सुखमय बनता है. वैवाहिक जीवन में आ रही बाधा, रूकावट या समस्या खत्म हो जाती है. जीवन में सुख, शांति, प्रेम और सकारात्मकता आती है.

विवाह पंचमी पर क्यों नहीं होती शादियां ?

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और माता सीता को आदर्श पति-पत्नी के रूप में जाना जाता है. विवाह पंचमी के दिन राम जी ने मां सीता को अपनी जीवनसंगनी बनाया था, लेकिन मान्यता अनुसार विवाह के बाद जनक दुलारी सीता जी का जीवन कष्टों से भरपूर रहा. पग-पग में उन्हें पीड़ा झेलनी पड़ी. शादी के बाद 14 साल तक उन्होंने पति संग वनवास में गुजारे.

धार्मिक मान्यता है कि माता सीता ने अपना वैवाहिक जीवन में  दुख-दर्द में ही निकाला.यही वजह है कि इस दिन लोग अपने बेटियों का विवाह करने से परहेज करते है. उनमें ये भाव है कि कहीं इस तिथि पर विवाह करने से कहीं बेटी को भी सीता जी के समान कष्टों से न गुजरना पड़े.

पूजा विधि

  • पंचमी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद श्री राम का ध्यान पूरे मन से करें.
  • एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें और आसन बिछाएं.
  • अब चौकी पर भगवान राम, माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें.
  • राम को पीले और सीता जी को लाल वस्त्र पहनाएं करें.
  • दीपक जलाकर दोनों का तिलक करें, फल-फूल नैवेद्य अर्पित कर विधि-विधान के साथ पूजा करें.
  • पूजा करते हुए बालकाण्ड में दिए गए विवाह प्रसंग का पाठ करें.
  • इस दिन रामचरितमानस का पाठ करने से जीवन और घर में सुख-शांति बनी रहती है.

मनोकाना पूर्ति के लिए करें ये उपाय

  • मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए विवाह पंचमी के दिन व्रत रखकर श्रीराम और माता सीता का पूजन करें. उनका विवाह संपन्न कराएं और अपनी इच्छापूर्ति की कामना करें.
  • वैवाहिक जीवन में किसी तरह की समस्या है तो आपको विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस में लिखे राम-सीता प्रसंग का पाठ करना चाहिए.
  • ऐसा माना जाता है कि रामचरितमानस विवाह पंचमी के दिन ही पूरी हुई थी, इसलिए यदि इस दिन घर में इसका पाठ कराते हैं तो इससे घर में मौजूद नकारात्मकता दूर होती है और परिवार में सुख शांति आती है. संबंध अच्छे बनने लगते हैं.
  • इस दिन सीमा-राम की विधि-विधान से पूजा करने और श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से मनोकामना पूर्ण होती है.
  • पहले से कोई संतान है और उसे किसी तरह की समस्या है, तो वो परेशानी भी दूर हो सकती है.

जरूर पढ़ें
spot_img

मोस्ट पॉपुलर