17 मई से पुरुषोत्तम मास, नौ नारायण, सप्त सागर और 84 महादेव यात्रा के लिए आएंगे श्रद्धालु

15 जून तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए देशभर से उज्जैन आएंगे हजारों श्रद्धालु

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से प्रारंभ हो रहा है, जो 15 जून तक चलेगा। ज्येष्ठ माह के साथ अधिक मास का यह विशेष संयोग भक्तों के लिए साधना और पुण्य अर्जित करने का दुर्लभ अवसर लेकर आया है। एक माह चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान में देशभर से श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ला के अनुसार, अधिक मास पंचांग को संतुलित करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच हर साल होने वाले 10 से 11 दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे ही मल मास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। यह अवधि जप-तप और दान के लिए सर्वोत्तम मानी गई है।
मल मास कैसे बना पुरुषोत्तम मास
धर्माचार्य पं. हरिनारायण शास्त्री ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वामी विहीन होने के कारण जब इस मास को तिरस्कार का सामना करना पड़ा, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम प्रदान किया। श्रीहरि के वरदान स्वरूप इस मास में की गई भक्ति का फल अनंत गुना हो जाता है और भक्त के अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है।
उज्जैन में अधिकमास के दौरान होने वाली यात्राएं
सप्त सागर यात्रा- इसमें रुद्र सागर, पुष्कर सागर, क्षीर सागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर की वंदना होगी।
नौ नारायण दर्शन- शेष नारायण, पद्म नारायण, पुरुषोत्तम नारायण सहित नौ स्वरूपों के दर्शन का विशेष महत्व रहेगा।
84 महादेव यात्रा- पूरे माह शिव भक्तों का तांता 84 महादेव मंदिरों में लगा रहेगा।









