न सब चैंबर का निर्माण ना ही लाइन डाली

By AV NEWS

सीवरेज प्रोजेक्ट: 24 माह का काम 70 महीने में भी अधूरा

न सब चैंबर का निर्माण ना ही लाइन डाली

क्या फिर खोदेंगे सड़क क्योंकि मकानों के कनेक्शन चैंबर, पाइप ही नहीं कहां से निकलेगा घरों का गंदा पानी

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:भूमिगत सीवरेज प्रोजेक्ट में पाइप लाइन बिछाने वाली टाटा कंपनी की एक और बड़ी खामी सामने आई है। शहर की अनेक कॉलोनियों में लाइन डालने के दौरान घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए पाइप तो डाले नहीं और चैंबर भी नहीं बनाए हैं। ऐसे में नागरिकों को बाद में यह काम तो करना होगा,घरों के सामने की सड़क एक बार फिर से खोदी जाएगी।

टाईम लिमिट से महीनों लेट चल रहे टाटा प्रोजेक्ट्स ने काम शीघ्रता से नहीं किया और जमकर लापरवाही भी बरती हैं। कंपनी ने पहले तो काम को धीमी गति से शुरू किया। दबाव बढ़ा तो कंपनी ने तेजी दिखाने के लिए अपने हिसाब से काम किया। इसमें एक भारी खामी सामने आई है।

आने वाले दिनों में शहर और नागरिकों को इसका खामियाजा तो भुगतना पडेगा। दरअसल प्रोजेक्ट के तहत घरों के पाइप को सब चैंबर से सीवरेज लाइन से जोडने के लिए हर तीन घरों के सामने चैंबर का निर्माण करना हैं। इसमें कंपनी को कॉलोनियों की मेन सीवरेज लाइन के साथ ही घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए मेन लाइन से अलग चैंबर बनाकर इसे पाइप के जरीए मेन लाइनों के चैंबर से जोडऩा हैं,ताकि घरों के पाइप से गंदा पानी मेन सीवरेज तक बहाया जा सकें। कंपनी सड़क खुदाई और मेन लाइन के बाद उस पर सीमेंट कांक्रीट कर रही हैं।

इन सब के बीच शहर की अनेक कॉलोनियों में घरों के गंदे पानी की निकासी के पाइप/कनेक्शन के लिए चैंबर ही नहीं रखे हैं और न पाइप डाले गए हैं। इन हालात में सीवरेज के सब चैंबर और इसे मेन लाइन से जोडऩे के लिए फिर से खुदाई करना होगी। यानी मेन सीवरेज प्रोजेक्ट पूरा होने के पहले घरों के सामने की सड़क एक बार फिर से खोदी जाएगी।

80,305 घरों के कनेक्शन करना है

शिप्रा शुद्घि और शहर को खुले नाले-नालियों से मुक्त के लिए निगम ने 6 नवंबर 2017 को शहर में भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कराया था।

तय हुआ था कि कंपनी नवंबर-2019 तक कंपनी शहर में सीवरेज पाइपलाइन का नेटवर्क बिछाएगी और सुरासा में ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगी। 70 माह गुजर गए लेकिन कंपनी ने अब तक काम पूरा नहीं किया है। ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी अधूरा है। अनुबंध मुताबिक टाटा कंपनी को दो साल में प्रोजेक्ट पूरा करना था।

 शहर में पाइप लाइन बिछाने के बाद टाटा कंपनी शहर के 80305 मकानों के पाइप को सीवरेज लाइन से जोडऩा हैं। खास बात यह कि कई कॉलोनियों में मकानों के कनेक्शन के सब चैंबर नहीं बनाए हैं। इनकी पाइप लाइन का सवाल ही नहीं। ऐसे में प्रोजेक्ट के उद्देश्य सवाल खड़ा हो रहा हैं।

हर घर से 2 हजार रुपए कनेक्शन चार्ज लेना हैं और सीवरेज प्रारंभ होने पर 150 रुपए महीना शुल्क वसूला जाएगा। कनेक्शन से खुली नालियां बंद होंगी और घर-दुकान का गंदा पानी सीवरेज में जाएगा।

केवल नोटिस और पेनल्टी

सीवरेज प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य २ साल में रखा गया था,लेकिन 6 वर्ष में भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। दावा किया जा रहा है कि शहर के 54 में से 35 वार्डों में सीवर पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने का 64 प्रतिशत काम हो चुका है। लक्ष्य 413 किलोमीटर में से 265 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति यह है कि शिप्रा नदी के किनारे 15 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन बिछाने का काम अब भी में बचा है।

कायदे से काम में लापरवाही बरतने पर इसका ठेका भी कई वर्ष पहले निरस्त कर देना था पर नहीं किया गया। उल्टा हर छह माह में प्रोजेक्ट पूर्ण करने की समयावधि बढ़ाते चले गए। हां, ठेका निरस्त करने के 14 नोटिस देकर दंड स्वरूप कंपनी पर 22 करोड़ रुपये की पेनल्टी जरूर लगाई मगर इससे अधिक कुछ नहीं किया। निगम ने 30 नवंबर तक प्रोजेक्ट पूरा करने के निर्देश दिए हैं,पर काम की गति देख प्रोजेक्ट साल 2024 तक भी पूर्ण होना मुश्किल दिखाई पड़ता है।

प्रोजेक्ट के संबंध में नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अफसरों को चर्चा करने के बाद सप्ताहभर में बैठक कर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। कार्य पूर्ण करने के लिए लक्ष्य का निर्धारण भी होगा। – मुकेश टटवाल, महापौर।

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