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34 दिन में तय की दंडवत 100 किलोमीटर की दूरी

नलखेड़ा में बगलामुखी के दर्शन कर शुरू की यात्रा, उज्जैन पहुंचे

पवन कुमार पाठक उज्जैन। श्रद्धा और संकल्प जब अडिग हो, तो रास्ते और दूरियां मायने नहीं रखतीं। कुछ ऐसा ही कमाल वृंदावन के बाल संत ऋषभदास महाराज कर रहे हैं। वह दंडवत धार्मिक यात्रा पर निकले हैं। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व से नलखेड़ा (आगर-मालवा)से शुरू हुई उनकी यात्रा 34 दिन में 100 किलोमीटर का सफर तय कर अब उज्जैन पहुंच चुकी है। उज्जैन में उनका श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। बाल संत ऋषभदास महाराज की यह यात्रा कोई साधारण दंडवत यात्रा नहीं है। वे चारधाम, 12 ज्योतिर्लिंग और 42 शक्तिपीठों के दर्शन का संकल्प लेकर निकले हैं। इन जगहों पर जाने के लिए उन्हें 80 हजार किलोमीटर की दूरी दंडवत (प्रणाम करते हुए) तय करनी होगी। एक दिन में ३ किलोमीटर का सफर तय करने के अनुमान से कठिन संकल्प को पूर्ण करने में उन्हें लगभग 70 वर्ष का समय लग सकता है।

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प्रतिदिन तीन किलोमीटर का किया सफर

यात्रा की कठिनाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बालसंत मीन पर लेटकर प्रणाम (दंडवत) करते हुए एक दिन में केवल 3 किलोमीटर का फासला ही तय कर पा रहे हैं। उनके साथ टॉय कार भी चल रही है। इसमें उनके इष्ट लड्डू गोपाल (ठाकुर जी) बैठे हैं। आकर्षक पोशाक,एवं चश्मा लगाए ठाकुरजी उनके शक्ति प्रदान कर रहे हैं। । यात्रा उज्जैन के हरिफाटक ब्रिज से गुजरी, तो बड़ी संख्या में शहरवासियों ने संत और ठाकुर जी का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। यात्रा के दौरान रास्ते में आनेवाले गांवों और शहरों में भक्त उनके भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं।

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मां बगलामुखी से मिला स्वप्न में आदेश

महाराज के साथी विशाल बैरागी ने बताया कि यात्रा की प्रेरणा बाल संत को मां बगलामुखी देवी से मिली थी। मां ने उन्हें स्वप्न दर्शन देकर नलखेड़ा से यात्रा प्रारंभ करने का संदेश दिया था। इसी का पालन करते हुए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन (१९ मार्च २०२६) को नलखेड़ा स्थित सिद्धपीठ में दर्शन कर उन्होंने यात्रा शुरू की थी। ३४ दिन में अब तक उन्होंने १०० किलोमीटर का सफर तय कर लिया है।

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पहले भी कर चुके हैं पदयात्राएं
संत ऋषभदास इससे पूर्व चारधाम और ज्योतिर्लिंगों की पदयात्रा कर चुके हैं। हालांकि, इस बार की दंडवत यात्रा को उनकी सबसे कठिन परीक्षा मानी जा रही है

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