पीयूष भार्गव की नियुक्ति पर संकट उत्पीडऩ के आरोप जांच में सही साबित

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। संविदा पर नगर निगम में फिर से नियुक्ति का रास्ता तलाश रहे सेवानिवृत कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नगर निगम की आंतरिक परिवाद समिति ने उन पर लगे उत्पीडऩ के आरोपों को सही माना है। ऐसे में जून से परामर्शी इंजीनियर पद की नियुक्ति की आस लगाए भार्गव के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है।

करीब एक साल पहले 13 मार्च 2025 को नगर निगम में पदस्थ महिला उपयंत्री ने भार्गव पर अश्लील चैटिंग, शारीरिक संबंध बनाने और घर पर बुलाने के गंभीर आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं आई मिस यू और आई लव यू कहने की शिकायत भी की थी। यह मामला तब खूब सुर्खियों में बना था। नगरनिगम के तत्कालीन आयुक्त आशीष पाठक ने तब समिति का गठन किया था और जिसने क्लीन चिट दे दी थी। मामला पुलिस तक भी पहुंचा था और वहंा अब तक लंबित है।
इस बीच हाईकोर्ट के आदेश पर निगम ने आंतरिक परिवाद समिति गठित की थी। सरिता मांडरे की अध्यक्षता वाली समिति में योगेंद्र पटेल, वीणा बौरासी, श्वेता यादव और शिवमंगला सिसौदिया सदस्य हैं। सभी पक्षों से चर्चा करने के बाद समिति ने तीन आरोपों की जांच की। इसमें तीनों सही पाए गए हैं। ऐसे में समिति ने प्रकरण में बतौर सबूत दी गई ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॅारेसिंक जांच और भार्गव का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुशंसा की है।
जून में होनी है पदस्थापना नगर निगम के सिंहस्थ डिविजन ने निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए परामर्शी पद के लिए तीन पद निकाले हैं। बीई सिविल, बीटेक सिविल के साथ 25 साल का कार्यनुभव मांगा गया है। ७० साल तक की उम्र वाले आवेदन कर सकते हैं। माना जा रहा है कि यह पद भार्गव के लिए ही निकाले गए हैं, जो संविदा पीरियड खत्म होने के बाद फिलहाल घर पर हैं। इस संबंध पीयूष भार्गव से चर्चा का प्रयास किया तो बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष मिलेगा आपकों बतायेेंगे।









