अब लेखन सुविधाजनक हो गया, पहले लिखना आसान छपना मुश्किल था

वर्तमान में लेखन सुविधाजनक हो गया है। पहले लिखना आसान, छपना मुश्किल था। अब संपादक की कृपा का इंतजार का समय खत्म हो गया है। लेखन में श्रेष्ठता के लिए किसी एक आयाम पर लिखा जाना चाहिए। जो पढ़ेगा वही लिखेगा भी। भारतीय भाषाओं में चुनौतियों के साथ किसी भी विषय पर लेखन से स्थापित हुआ जा सकता है।

भाषा आती है स्वाध्याय से। जिस भाषा में सौंदर्य नहीं व लोकप्रिय नहीं होती। लेखन से स्वाध्याय ही प्राप्त होता है। अनछुए पहलुओं पर लिखा जाना चाहिए। यह बात भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के निदेशक वरिष्ठ पत्रकार प्रो. संजय द्विवेदी ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के 14 राज्यों के प्रचार-प्रसार संयोजक और सह संयोजकों की बैठक भी कही।
आलोक कुमार ने कहा कि किसी भी विमर्श को स्थापित करने के लिए शोध होना आवश्यक है। विमर्श स्थापना के लिए एक मत होना भी जरूरी है। वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी, अरुण आनंद, अनंत विजय, रोहित कौशल, आशीष कुमार अंशु, संजय स्वामी, आयुष गुप्ता ने भी संबोधित किया।









