एसजीपीजी ने नियुक्ति निरस्त की, अध्यक्ष बोले- मुझे समाज ने चुना

गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा दूधतलाई की कार्यकारिणी को लेकर बवाल मचा, पांच सदस्यीय अमृतधारी समिति गठित
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। करीब बीस दिन पहले स्वयंभू तरीके से गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा दूधतलाई के अध्यक्ष बने भाजपा नेता इकबाल सिंह गांधी की नियुक्ति सिखों की सबसे बड़ी संस्था एसजीपीसी (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ) ने निरस्त कर दी है। गांधी ने कहा कि गुरु द्वारा गुरु सिंह सभा रजिस्टर्ड बॉडी है और इसके बायलाज के तहत ही मुझे चुना गया है।
दरअसल गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष का चुनाव पहले दो साल के लिए होता था। पिछले साल इस पद के लिए चुनाव की हलचल शुरू हुई तो दो गुट हो गए। समाज में एकता का संदेश देने के लिए तब मध्यस्थता की गई और एक साल के भाजपा नेता इकबालसिंह गांधी को अध्यक्ष बनाया गया। कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे साल के मनजीत डंग को अध्यक्ष बनना था लेकिन अप्रैल में साधारण सभा ने गांधी को ही अगले तीन साल के लिए अध्यक्ष बना दिया। इस मामले की शिकायत एसजीपीसी (अखाल तख्त) को हुई तो उसने जांच रिपोर्ट तलब की। इसमें यह सामने आया कि चुने गए अध्यक्ष अमृतधारी नहीं है।
अमृतधारी होने के लिए यह जरूरी
अमृतधारी होने के लिए सिख धर्म के कुछ नियमों का कड़ाई से पालन करना जरूरी होता है। इसमें पांच ककार (केश, कच्छा, कंघा, कड़ा और कृपाण) धारण करने होते हैं। अमृतधारी को व्यसन से दूर रहना होता और नियमित अरदास करनी होती है। केश यानी दाढ़ी और बाल नैचुरल रखने होते हैं। इन सब स्थितियों को देखते हुए एसपीजीसी ने नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। उसने पांच सदस्यीय कमेटी को प्रबंध सौंपते नई अमृतधारी कमेटी चुनने के आदेश दिए। इस संबंध में एसजीपीसी ने कलेक्टर, एसपी, बैंक मैनेजर, फम्र्स एंड सोसायटी के रजिस्ट्रार को लेटर भी भेजा। गुरुमुखी के साथ हिंदी में भी पत्र की कॉपी भेजी गई है।
एसजीपीसी नहीं, साधारण सभा सर्वोपरि
अक्षरविश्व ने इस संबंध में गुरुद्वारा गुरु सिंघ सभा दूधतलाई के अध्यक्ष इकबालसिंह गांधी से सीधी बात की।
Q आपकी नियुक्ति एसजीपीसी ने निरस्त कर दी है?
उत्तर : एसजीपीसी को नियुक्ति निरस्त करने का अधिकार नहीं है। मुझे साधारण सभा ने चुना है। गुरुद्वारा गुरु सिंघ सभा दूधतलाई फम्र्स एंड सोसायटी में रजिस्टर्ड है। इसके नियमों के अनुसार साधारण सभा का निर्णय सर्वोच्च होता है। उस मुताबिक मैं अध्यक्ष हूं।
Q आरोप है कि आपने कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाकर तीन साल कर लिया?
उत्तर : कार्यकारिणी का तीन साल का कार्यकाल तत्कालीन अध्यक्ष सरदार सुरेंद्रसिंह अरोरा ने बढ़ाया था। वह वैसा ही चला आ रहा है।
Q अध्यक्ष पद के लिए अमृतधारी होना जरूरी है? क्या आप अमृतधारी हैं?
उत्तर : ऐसा कुछ नहीं है। अगर इस मानक को पूरा करेंगे तो पूरे मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष फेल हो जाएंगे।








