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जमातखाने में निकाह, कन्यादान योजना का लाभ उठाया, जांच की मांग

एमआईसी सदस्य की शिकायत के बाद महापौर ने कहा जांच करें, नोडल अधिकारी ने बताया आरोपों को गलत

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उज्जैन। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 19 अप्रैल को कार्तिक मेला प्रांगण में हुए सामूहिक विवाह के बाद अब विवाद की स्थिति बन गई है। एमआईसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी ने शिकायत की है कि कुल 112 में से 12 जोड़ों ने आयोजन स्थल की जगह हेलावाड़ी जमातखाने में आयोजित कार्यक्रम में निकाह पड़ा है। ऐसे में उन्हें योजना से बाहर किया जाना चाहिए। वहीं महापौर मुकेश टटवाल ने इस मामले पर अधिकारियों को जांच का कहा है।

गौरतलब है कि इस विवाह सम्मेलन में कुल 112 जोड़ों का पंजीयन किया गया था, जिसमें 100 हिंदू और 12 मुस्लिम जोड़े थे। नियमों के अनुसार इन सभी जोड़ों का विवाह और निकाह मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मुख्य पांडाल में ही होना था। आयोजन के दिन 100 हिंदू जोड़ों ने तो विधि-विधान के साथ आयोजन स्थल पर विवाह किया। लेकिन पंजीकृत 12 मुस्लिम जोड़े मुख्य कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय हेलावाड़ी क्षेत्र में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में निकाह किया।

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उल्लेखनीय है कि आयोजन से ठीक एक दिन पूर्व महापौर मुकेश टटवाल और एमआईसी सदस्यों ने स्थल निरीक्षण कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी 112 जोड़ों की उपस्थिति मुख्य आयोजन स्थल पर होना चाहिए। प्रश्न यह है कि जब इन जोड़ों ने शासन द्वारा निर्धारित स्थल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति वाले कार्यक्रम में निकाह नहीं किया तो क्या वे योजना के तहत दी जाने वाली 49-49 हजार रुपये की आर्थिक सहायता के पात्र रहेंगे।

महापौर मुकेश टटवाल और लोक निर्माण विभाग के प्रभारी व एमआईसी सदस्य शिवेन्द्र तिवारी ने आपत्ति जताते हुए निगम आयुक्त को पत्र लिखा है। महापौर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह गहन जांच का विषय है कि आखिर किसके आदेश से इन जोड़ों का निकाह सरकारी आयोजन से दूर किसी अन्य स्थान पर कराया गया।

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इनका कहना: आरोप सरासर गलत है। सभी जोड़ों का विवाह और निकाह आयोजन स्थल पर हुआ है। फोटो के वक्त जरूर ये लोग मौजूद नहीं थे। हेलावाड़ी के एक कार्यक्रम में होने वाली दावत में शामिल होने यह लोग जल्दी चले गए थे।
संदीप शिवा, निगम अपर आयुक्त एवं नोडल अधिकारी

क्या कहता है नियम

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के नियमों में स्पष्ट है कि निर्धारित सामूहिक आयोजन में सम्मिलित होना प्रत्येक लाभार्थी के लिए अनिवार्य है। यदि कोई लाभार्थी बिना किसी सक्षम स्वीकृति या ठोस कारण के प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थल के बजाय अन्यत्र विवाह या निकाह करता है, तो वह योजना के तहत मिलने वाली 49,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि की पात्रता स्वत: ही खो देता है।

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