पंचक्रोशी : 118 किलोमीटर का सफर कर शहर पहुंचे यात्री,

अष्टतीर्थ यात्रा और बल लौटाना शुरू

अपने अनुभव को किया साझा, शहर में जगह-जगह पर यात्रियों का स्वागत
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। वैशाख महीने की तपती धूप में 118 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर पंचक्रोशी यात्री शहर पहुंचने लगे हैं। वह अष्टतीर्थ यात्रा कर रहे हैं और यात्रा शुरू करने से पहले भगवान नागचंद्रेश्वर से लिया बल लौटाने के लिए पटनी बाजार पहुंचने लगे हैं। यात्रियों की मौजूदगी के कारण पुराने शहर में भीड़ की स्थिति है।
तय समय से पहले चले यात्री अब तेजी से शहर पहुंच रहे हैं। जय महादेव का नारा लगाते हुए शहर पहुंचे यात्रियों ने अपनी यात्रा को सुकून देने वाली बताया है। उज्जैन के साथ आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग आए हैं। इनमें से ऐसे भी यात्री है जो पांच से ज्यादा बार पंचक्रोशी यात्रा कर चुके हैं। अक्षरविश्व के रिपोर्टर पवन पाठक ने इनसे बात की और यात्रा की खूबी और कमियों पर चर्चा की।
मां को देखकर यात्रा शुरू की थी
मां भंवरबाई पंचक्रोशी करने आती थीं। उन्हें देखकर मैंने भी यात्रा शुरू की। अब तक छह यात्रा हो चुकी है। यह बहुत ही आनंददायक रहती है। गर्मी का महीना होने के बाद भी कष्ट नहीं होता।-मोहन गायरी, नीमन जावरा
चाचा के साथ चला आया
चाचा पंचक्रोशी आ रहे थे। मैंने भी जिद पकड़ ली। पहली बार यात्रा की। मजा आ गया। अब हर बार करूंगा।-उमेश मदनलाल, जावरा
दूसरी बार यात्रा पर आया हूं
दूसरी बार यात्रा पर आया हूं। पूरी यात्रा में अलग ही अनुभव होता है। ऐसा लगता है जैसे भोलेनाथ खुद हाथ पकडक़र ले जा रहे हैं। कही भी थकान नहीं होती।-अर्जुन, बड़ौद
पूरे परिवार के साथ यात्रा की
पूरे परिवार के साथ यात्रा की। खूब अच्छा लगा। ऐसा आनंद कहीं नहीं मिलता।-ज्ञानसिंह, शुजालपुर
व्यवस्था अच्छी थी
पंचक्रोशी में व्यवस्था अच्छी थी। लोगों ने खूब सेवा की।-लक्ष्मी कुंवर, राजगढ़
रास्ते में तबीयत खराब हो गई, फिर चल पड़े
नौवीं बार यात्रा की। इस बार रास्ते मेंं तबीयत बिगड़ गई लेकिन इलाज करवाकर फिर चल दी।-अजुतदेवी, राजगढ़
यात्रियों के स्वागत में जुटे शहरवासी
यात्रियों के स्वागत में शहरवासी जुटे हुए हैं। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह पानी, छाछ, ज्यूस और खान-पान सामग्री से स्वागत किया जा रहा है। इधर, पैदल पंचक्रोशी कर रहे महापौर मुकेश टटवाल, एमआईसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी, प्रकाश शर्मा, रजत मेहता, जितेंद्र कुवाल भी लौट आए हैं।








