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पाटीदार के बेखौफ प्लान ने गुजरात का फाइनल में जाने का सपना तोड़ा

पाटीदार के तूफान से कांपा गुजरात, आरसीबी फिर फाइनल में

आईपीएल में कई खिलाड़ी आते हैं और कुछ वक्त बाद गुमनाम हो जाते हैं, लेकिन रजत पाटीदार ने अपने खेल से अलग पहचान बना ली है। साल 2021 में जब पहली बार उन्हें आईपीएल ऑक्शन में चुना गया था, तब उन्हें एक ऐसा बधाई संदेश मिला जिसने उनके लिए उस पल को और खास बना दिया। दिलचस्प बात यह थी कि जिनसे संदेश आया, उनका नंबर तक पाटीदार के पास मौजूद नहीं था।

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कुछ साल बाद वही खिलाड़ी अब आईपीएल के सबसे बड़े मुकाबलों में विरोधी टीमों के लिए खतरा बन चुका है। क्वालिफायर-1 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ रजत पाटीदार ने ऐसी बल्लेबाज़ी की जिसने पूरे स्टेडियम को हैरान कर दिया। सिर्फ 33 गेंदों में नाबाद 93 रन बनाते हुए उन्होंने एक के बाद एक 9 लंबे छक्के जड़ दिए। उनकी इस विस्फोटक पारी को देखकर विराट कोहली भी उत्साह से भर उठे और हर शॉट पर उनका रिएक्शन देखने लायक था।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए यह मुकाबला बेहद अहम था और टीम ने उसमें पूरी तरह दबदबा दिखाया। धर्मशाला के मैदान पर खेले गए इस बड़े मुकाबले में आरसीबी ने गुजरात को 92 रन से हराकर लगातार दूसरी बार फाइनल में जगह बना ली। बल्लेबाज़ी से लेकर गेंदबाज़ी तक, हर विभाग में बेंगलुरु की टीम विरोधियों पर भारी नजर आई।

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रजत पाटीदार की इस पारी को आईपीएल इतिहास की सबसे बेखौफ पारियों में गिना जा रहा है। जिस आक्रामक अंदाज़ में उन्होंने गेंदबाज़ों पर हमला बोला, वैसा प्रदर्शन बड़े-बड़े पावर हिटर्स भी कम ही कर पाते हैं। शांत स्वभाव वाले पाटीदार मैदान पर बिल्कुल अलग अंदाज़ में नजर आते हैं और यही बात उन्हें खास बनाती है।

सबसे तेज़ 100 आईपीएल छक्के पूरे करने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में भी उनका नाम शामिल हो चुका है। इस रिकॉर्ड में उनसे आगे सिर्फ वेस्टइंडीज के आंद्रे रसेल और निकोलस पूरन हैं। खास बात यह रही कि पाटीदार ने क्रिस गेल जैसे विस्फोटक बल्लेबाज़ को भी पीछे छोड़ दिया। गेल ने जहां यह मुकाम 943 गेंदों में हासिल किया था, वहीं पाटीदार उनसे पहले यह उपलब्धि अपने नाम कर चुके हैं।

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रजत पाटीदार का सफर आसान नहीं रहा। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें पहचान मिली। मध्य प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी अहम भूमिका निभाई थी। उस दौरान कोच चंद्रकांत पंडित ने उनकी प्रतिभा को काफी करीब से देखा और भरोसा जताया था। उसी भरोसे का नतीजा रहा कि मध्य प्रदेश ने कई दशक बाद रणजी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक पाटीदार को ज्यादा मौके नहीं मिले हैं। उन्होंने कुछ टेस्ट और वनडे मुकाबले जरूर खेले, लेकिन अभी तक बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके बावजूद आने वाले समय में टी20 टीम के चयन के दौरान उनका नाम चर्चा में रहना तय माना जा रहा है, खासकर आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे को देखते हुए।

उम्र को लेकर भी पाटीदार पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में कई खिलाड़ियों ने साबित किया है कि 30 साल की उम्र के बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा प्रभाव छोड़ा जा सकता है। सूर्यकुमार यादव इसका सबसे बड़ा उदाहरण माने जाते हैं। ऐसे में पाटीदार के लिए भी टीम इंडिया के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं माने जा रहे।

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