महाकाल: अवैध पार्किंग-अतिक्रमण से बेहाल

जप-अनुष्ठान के लिए आने वाले ब्राह्मणों को पार्किंग की दरकार, अंडरपास और मल्टीपल पार्किंग जरूरी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाकाल मंदिर के आसपास सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण और बेतरतीब वाहनों की अवैध पार्किंग मंदिर के पुजारियों, पुरोहितों और स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। मंदिर से जुड़े पुरोहितों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए अब तक दो बार विस्तृत योजना (प्लान) प्रशासन को सौंप चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है।
महाकाल मंदिर के शिखर दर्शन के प्रथम तल पर नवनिर्मित अभिषेक कक्ष के समीप पुजारियों के कक्ष हैं, जहां से जप और अनुष्ठान की मुख्य व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। इन अनुष्ठानों के लिए प्रतिदिन करीब 300 से 400 ब्राह्मण मंदिर आते हैं, जिनके प्रवेश के लिए बड़े गणेश मंदिर के सामने स्थित उत्तरी द्वार निर्धारित है। पर्याप्त जगह न होने के कारण इन ब्राह्मणों के वाहन बड़े गणेश की तंग गली में ही खड़े रहते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है।
पुजारियों ने पूर्व प्रशासक संदीप कुमार सोनी से लेकर वर्तमान प्रशासक प्रथम कौशिक तक यह मांग दोहराई है कि फैसिलिटी सेंटर-3 या रुद्रसागर के समीप नवनिर्मित ध्यानकुटी परिसर में स्थायी मल्टीपल पार्किंग का निर्माण कराया जाए। जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक ध्यानकुटी के पास अस्थायी पार्किंग शुरू की जाए।
अतिक्रमणकर्ताओं ने भी जमा रखा है कब्जा, सड़क पर लगा ली दुकानें
मंदिर के आसपास अतिक्रमण की स्थिति इतनी गंभीर है कि विद्युत डीपी के आसपास तक फूल-प्रसाद की दुकानें सजा दी गई हैं, जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। एक माह बाद अधिकमास और उसके बाद श्रावण आएगा। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्तों की सुविधा के लिए इस समय रहते अतिक्रमण मुक्त व्यवस्था बनाना आवश्यक है। इस बाबत मंदिर समिति के सुरक्षा अधिकारी जयंत राठौर ने बताया कि मंदिर के बाहर अतिक्रमण हटाने का काम निगम और पुलिस का है।
सुगम यातायात का मास्टर प्लान
पू र्व मंदिर समिति सदस्य एवं वरिष्ठ पुजारी पं. राम शर्मा ने यातायात को सुचारू बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन को फैसिलिटी सेंटर-3 में स्थायी पार्किंग बनाने के साथ-साथ बड़ा गणेश मंदिर से अभिषेक स्थल तक एक अंडरपास का निर्माण करना चाहिए।
इस अंडरपास के बनने से पुजारी, पुरोहित और अनुष्ठान के लिए आने वाले ब्राह्मण कहारवाड़ी से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे हरसिद्धि मंदिर से महाराजवाड़ा चौराहा तक के मुख्य मार्ग पर सड़क पर दबाव कम होगा और बाहरी श्रद्धालुओं को भी सुगम यातायात मिल सकेगा। उन्होंने जोर दिया कि ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा और शहर की व्यवस्था के लिए इस प्रस्ताव पर गौर करना चाहिए।









