बच्चा देर से बोल रहा है? इन आसान तरीकों से बढ़ाएं उसकी बोलने की क्षमता

हर बच्चा अपने तरीके से बढ़ता और सीखता है। कुछ बच्चे जल्दी बोलना शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ बच्चों को बोलने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन अगर बच्चा उम्र के हिसाब से काफी देर तक बोलना शुरू नहीं करता, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कई बार बच्चों का देर से बोलना सामान्य होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में समय पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बच्चों में बोलना कब शुरू होता है?
आमतौर पर बच्चे करीब 1 साल की उम्र तक “मम्मा”, “पापा” जैसे आसान शब्द बोलना शुरू कर देते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे उनका शब्द भंडार बढ़ने लगता है। 2 साल की उम्र तक ज्यादातर बच्चे छोटे-छोटे वाक्य बोलने की कोशिश करने लगते हैं।अगर बच्चा इस उम्र तक बहुत कम बोल रहा है या बोलने की कोशिश नहीं कर रहा है, तो माता-पिता को इस पर ध्यान देना चाहिए।
बच्चे के देर से बोलने के क्या कारण हो सकते हैं?
बच्चे के देर से बोलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हर बार इसका कारण कोई बड़ी समस्या नहीं होती। कुछ सामान्य कारण ये हो सकते हैं:
- सुनने में परेशानी होना
- बच्चे से कम बातचीत होना
- ज्यादा समय मोबाइल या टीवी देखने में बिताना
- भाषा सीखने में देरी होना
- कुछ बच्चों का विकास अपनी अलग गति से होना
कई बार बच्चा बातें समझता सब है, लेकिन उन्हें बोलने में थोड़ा समय लेता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
अगर बच्चा उम्र के अनुसार बोलने में काफी पीछे है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें:
- 1 साल की उम्र तक बच्चा कोई आसान शब्द न बोले
- 18 महीने तक इशारों से अपनी बात बताने की कोशिश न करे
- 2 साल की उम्र तक बहुत कम शब्द बोले
- आवाज सुनकर भी प्रतिक्रिया न दे
- आंखों में देखकर बात करने से बचे
ऐसी स्थिति में बच्चों के डॉक्टर या स्पीच विशेषज्ञ से सलाह लेना मददगार हो सकता है।









