सोमवार शाम को डेढ़ इंच बारिश, सूखती सोयाबीन की फसल को मिला जीवनदान

बारिश की लंबी खेंच से खरीफ सीजन की प्रमुख फसल पर मंडरा रहा था संकट, अब उम्मीद बंधी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सोमवार शाम करीब एक घंटे की तेज बारिश ने खरीफ फसलों को नया जीवन दे दिया है। सूख रहे खेतों में नमी लौट आई है। जिले में खरीफ फसल सीजन में अधिकतर किसानों ने सोयाबीन की बोवनी की है। हालाकि कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है इस बारिश से फसलों को कोई नुकसान नहीं है। खेतों में नमी से फायदा होगा। किसानों ने बताया अर्ली वैरायटी की सोयाबीन फसल में फली बनने लगी है।
सोमवार को दिन में बारिश जैसा माहौल नहीं था परंतु शाम को महाकालेश्वर महादेव की सवारी निकलने के समय बादल छाए और बारिश शुरू हो गई। जानकारी के अनुसार 24 घंटे में 38 एमएम यानि 1.49 इंच बारिश हुई है। उज्जैन शहर में ज्यादा पानी गिरा है। शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में कम बारिश हुई है। हालांकि इस बारिश ने किसानों के चेहरों पर उम्मीद की किरण ला दी है।
किसानों की चिंता खत्म
खरीफ की तिलहन फसल में 25 जून से 5 जुलाई के बीच सोयाबीन की बोवनी हुई थी। सोयाबीन फसल फ्लावरिंग स्टेज पर थी। पिछली बार 12 अगस्त को बारिश हुई थी इसके बाद बारिश की खेंच से सोयाबीन की फसल पीली पडऩे व मुरझाने लगी थी। खेतों में नमी खत्म होने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीर आने लगी थी। सोमवार शाम को हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है।
सोयाबीन की फ्लावरिंग स्टेज खत्म, फली बनने लगी
उप संचालक कृषि कमलेश राठौड़ ने बताया सोयाबीन की फसल 60 से 65 दिन की हो गई है। फ्लावरिंग स्टेज लगभग खत्म हो गई है। फसल में फली बनने लगी है। सोमवार को हुई बारिश फसल के लिए अमृत तुल्य है। मैदानी अधिकारियों से प्राप्त जानकारी अनुसार एवं किसानों से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्तमान में सोयाबीन की फसलों में कोई विशेष कीट रोग का प्रकोप नहीं है स्थिति सामान्य है।
मक्का की फसल को भी फायदा
काल भैरव रोड के किसान राजेंद्र जाट ने बताया क्षेत्र की मुख्य फसल सोयाबीन है। कुछ किसानों ने मक्का भी लगाई है। मक्का की फसल अभी छोटी है। सोमवार को हुई बारिश सभी फसलों के लिए अमृततुल्य है।
सोयाबीन की पांच लाख हेक्टेयर से अधिक बोवनी
कृषि उपसंचालक राठौड़ ने बताया जिले में लक्ष्य से अधिक 5,15,840 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ बोवनी हुई है। सर्वाधिक रकबा 506.9 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई है। इसमें 1.98 हजार हेक्टेयर मक्का, 0.09 हजार हेक्टेयर ज्वार, 3.10 हजार हेक्टेयर उड़द, 1.02 हजार हेक्टेयर मूंग, 0.85 हजार हेक्टेयर अरहर, 0.45 हजार हेक्टेयर तिल, 01.45 हजार हेक्टेयर मूंगफली तथा 5 लाख 06 हजार 900 हेक्टेयर रकबे में सोयाबीन की बोवनी की गई है।
अर्ली वैरायटी में आ गई है फली
रोहलकला के किसान विनोद आंजना ने बताया बारिश की खेंच के कारण खेतों की नमी कम हो रही थी सोमवार को हुई बारिश से तापमान और उमस से राहत मिली है। आंजना ने बताया सोयाबीन की अर्ली वैरायटी में फली आ गई है तथा लेट वैरायटी में फली बनने लगी है।








