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26 साल पहले संगठन के आदेश पर लौटाया था पार्षद का टिकट अब मिली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष की कमान

22 साल बाद उज्जैन विकास प्राधिकरण को मिला फुल फ्लैश संचालक मंडल, दो उपाध्यक्ष और पांच सदस्य मनोनीत

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। 26 साल पहले (2000) संगठन के आदेश पर वार्ड 5 से पार्षद का टिकट लौटाने वाले समाजसेवी डॉ. रवींद्र सोलंकी (रवि) उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बन गए हैं। 22 साल बाद (2004) बाद नगरीय एवं आवास विभाग ने प्राधिकरण में फुल फ्लैश संचालक मंडल (दो उपाध्यक्ष, पांच सदस्य) मनोनीत किया है। इन नियुक्तियों की खास बात यह है कि इन्हें समय में नहीं बांधते हुए आगामी आदेश तक रखा गया है।

प्राधिकरण अध्यक्ष पद पर अर्थव होटल एवं रिसोर्ट के संचालक रवि की नियुक्ति के चर्चे दो साल से चल रहे थे। सीएम डॉ. मोहन यादव की किचन कैबिनेट के सदस्य डॉ. सोलंकी को लो-प्रोफाइल माना जाता है।A ‘ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर का स्वभाव’ रखने वाले सोलंकी खरी-खरी बोलने के लिए जाने जाते हैं।

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दो बैचलर, एक पीजी के साथ वह पीएचडी धारक हैं। एबीवीपी के मंडल मंत्री पद से 1985 में राजनीति की शुरुआत करने वाले डॉ. सोलंकी भाजपा निवेशक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक रह चुके हैं। हालांकि राजनीति से ज्यादा वह समाज सेवा से जुड़े रहे हैं। पांच साल तक वह सेवाभारती के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं।

इसी कड़ी में कोरोना की पहली और दूसरी लहर में उन्होंने राशन वितरण, 200 बेड के अस्पताल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी। साल 2000 के नगरनिगम चुनाव में वार्ड 5 से उनको भाजपा का टिकट भी मिल गया था लेकिन अपील समिति के अनुरोध पर उन्होंने टिकट लौटा दिया था। अब यूडीए अध्यक्ष के तौर पर नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं।

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डॉ. सोलंकी कल संभालेंगे पदभार

डॉ. रवि सोलंकी मंगलवार शाम 4 बजे शुभ मुहूर्त में पदभार संभालेंगे। अक्षरविश्व से उन्होंने कहा सिंहस्थ सबसे बड़ा टॉस्क है। 30 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं की मेजबानी की सबसे अहम जिम्मेदारी उज्जैन विकास प्राधिकरण के पास है। इनमें 9 प्रमुख मार्गों पर बनने वाले स्वागत गेट, रेलवे ओवरब्रिज, यूनिटी मॉल और सड़कों के काम प्रमुख हैं। सिंहस्थ संबंधी यह काम समय और गुणवत्तापूर्ण कराना उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी।

दक्षिण का दबदबा, उत्तर से बैलेंस

आठ सदस्यीय संचालक मंडल में यूं तो छह सदस्य (अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, तीन संचालक) दक्षिण विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। दो संचालक उज्जैन उत्तर सीट से लेकर बैलेंस किया गया है। प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र उज्जैन उत्तर की बजाय दक्षिण में ज्यादा फैला है।

दो उपाध्यक्ष और पांच संचालक

यूडीए संचालक मंडल में मुकेश यादव और रवि वर्मा उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। अमित श्रीवास्तव, विजय अग्रवाल, रामचंद्र शर्मा (रामा गुरु), सुशीला जाटवा और दुर्गा बिलोटिया को सदस्य बनाया गया है। श्रीवास्तव और अग्रवाल वरिष्ठ भाजपाई हैं।

उपाध्यक्ष

मुकेश यादव- बजरंग दल के संयोजक रहे यादव भाजपा की पिछली नगर कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष थे। वह सीएम के नजदीक माने जाते हैं।
रवि वर्मा- उज्जैन दक्षिण विधानसभा के ग्रामीण मंडल से आने वाले वर्मा की देहात में अच्छी पकड़ है और इसका फायदा उन्हें मिला है।

संचालक

संचालक- अमित श्रीवास्तव एबीवीपी, भाजयुमो और भाजपा में कई पदों पर रह चुके हैं। वह वार्ड 50 से पार्षद भी रह चुके हैं। इसी तरह विजय अग्रवाल पुराने भाजपाई हैं। वह व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक रह चुके हैं। अग्रसेन समाज और उत्तर विधानसभा से होने के कारण उन्हें जगह मिली है। उज्जैन उत्तर से ही रामागुरु को भी जगह दी गई है। भाजपा की राजनीति में उन्हें बगावती तेवर के लिए जाना जाता है। समय-समय पर वह पार्टी को चुनौती भी देते रहे हैं। सुशीला जाटवा और दुर्गा बिलोटिया को महिला और आरक्षित वर्ग से होने के कारण स्थान मिला है।

सिंहस्थ के काम सबसे बड़ी चुनौती, इनमें पीपलीनाका का चौड़ीकरण प्रमुख

नए संचालक मंडल के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ के काम हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण के पास सिंहस्थ के करीब 3 हजार करोड़ रुपए के डिपाजिट वर्क हैं। इनमें पीपलीनाका-भैरवगढ़, पीपलीनाका-ओखलेश्वर, पीपलीनाका- जूना सोमवारिया सड़क, विक्रमनगर रेलवे ओवरब्रिज जैसे बड़े काम हैं। इन कामों को समय पर पूरा कराना सबसे बड़ी चुनौती है। पीपलीनाका सड़क चौड़ीकरण सबसे बड़ी दिक्कत है। इसे लेकर असहमति अभी भी बनी हुई है। इस क्षेत्र में माली समाज की बहुतायत है और यह आरएसएस-भाजपा का गढ़ है। माली समाज से आने वाले और आरएसएस के कट्टर स्वयंसेवक डॉ. सोलंकी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनों को मनाने की होगी।

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