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शिप्रा के पूर्वी और पश्चिमी तट पर बनेगी सडक़, स्नान के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की पहुंच होगी आसान

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। शिप्रा नदी के किनारों पर व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के अंतर्गत दोनों किनारों पर सडक़ निर्माण की योजना धरातल पर उतरने जा रही है। पूर्वी हिस्से में ६.१ किमी और पश्चिमी हिस्से में १७ किमी लंबी सडक़ नेगी जिससे घाटों तक सीधे और सुगमता से पहुंचा जा सकेगा।

 

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दरअसल, सिंहस्थ २०२८ की तैयारियों के मद्देनजर शिप्रा के घाटों के विस्तार के साथ कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी फोकस किया जा रहा है। पूर्वी तट पर प्रस्तावित ६.१ किमी लंबा मार्ग प्रशांति धाम से वाकणकर ब्रिज तक विकसित किया जाएगा। करीब ९ मीटर चौड़ा यह मार्ग घाटों के समानांतर रहेगा और विभिन्न घाटों को कनेक्ट करेगा। इससे श्रद्धालु सीधे और आसानी से घाटों तक पहुंच सकेंगे और अंदरूनी मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा।

वहीं पश्चिमी तट पर १७ किमी लंबा सडक़ मार्ग बनेगा जाएगा जो विस्तारित घाटों के साथ कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगा। यह मार्ग शहर के प्रमुख हिस्सों को शिप्रा तट से जोड़ेगा जिससे बड़े आयोजन के दौरान ट्रैफिक मैनेजमेंट और क्राउड मैनेजमेंट आसान होगा। यह दोनों सडक़ परियोजनाएं शिप्रा घाट विस्तार योजना के साथ विकसित की जा रही है। वर्तमान में घाटों की कुल लंबाई ९.७८ किलोमीटर है। इसके अलावा सिंहस्थ महापर्व के लिए नए घाटों का निर्माण भी तेजी से जारी है जिसके बाद घाटों की कुल लंबाई तकरीबन ४० किमी हो जाएगी।

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बेहतर कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा

यह सडक़ नेटवर्क सिंहस्थ २०२८ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से एकओर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ईकोनॉमिक बूस्ट भी आएगा। शिप्रा के दोनों किनारों पर विकसित हो रहा यह सडक़ नेटवर्क शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई पहचान देगा। घाटों तक आसानी से पहुंचना, बेहतर ट्रैफिक और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह परियोजना शहर को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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२९.२१ किमी के नए घाट

सिंहस्थ २०२८ के दौरान ३० करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में सभी आसानी से शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाए सकें इसलिए २९.२१ किमी के नए घाट बनाए जा रहे हैं। साथ ही ९.७८ किमी के पुराने घाटों का उन्नयन किया जाएगा। घाटों के साथ विकसित हो रहे इन मार्गों पर आधुनिक सुविधाओं का भी समावेश किया जाएगा। इनमें रैलिंग, लैम्प, स्ट्रीट लाइट, पीने के पानी की व्यवस्था और इमरजेंसी एग्जिट मार्ग शामिल है। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा के साथ सुरक्षा भी मिलेगी।

महापर्व की तैयारी… सिंहस्थ में निगरानी और ड्यूटी ऑनलाइन

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों युद्धस्तर पर चल रही है। आधुनिक और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही हाईटेक टेक्निक से सनातन के इस महापर्व को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस विभाग जुटा है। इसके तहत आगामी सिंहस्थ में इस बार पुलिस व्यवस्था हाईटेक और सेंट्रलाइज्ड होगी। आयोजन के लिए तैयार किया जा रहा डिजिटल ड्यूटी सिस्टम, सायबर सुरक्षा नेटवर्क और ट्रेनिंग फ्रेमवर्क भोपाल से डिजाइन हो रहा है जिसे उज्जैन में लागू किया जाएगा। आगामी सिंहस्थ के दौरान साइबर खतरों से निपटने के लिए भोपाल से साइबर कंट्रोल नेटवर्क संचालित होगा। यहां सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, फेक न्यूज ट्रैकिंग और साइबर फ्रॉड पर नजर रखी जाएगी।

दरअसल, सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार मेले को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के जरिए हाईटेक बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निगरानी और अधिक मजबूत हो सके। संवेदनशील और अति संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां विशेष पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरों के साथ एआई का उपयोग कर संदिग्ध गतिविधियों और लोगों की पहचान की जाएगी। क्राउड मैनेजमेंट, लापता लोगों की खोज, महिला सुरक्षा और अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है ताकि सिंहस्थ महापर्व को हर तरह से सुरक्षित बनाया जा सके। सिंहस्थ के दौरान आने वाले ३० करोड़ श्रद्धालुओं संभावित भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्लान भी तैयार किया जा रहा है। सुरक्षा को हाईटेक करने के लिए पुलिस विभाग मुस्तैदी से काम कर रहा है। इसी के तहत तीन दिन पहले डीजीपी कैलाश मकवाना ने उज्जैन में ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम की शुरुआत की थी।

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