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उज्जैन नगरीय निकाय चुनाव 2022 : टिकट नहीं मिलने पर असंतुष्ट दावेदार निर्दलीय उतरने को तैयार

बगावत रोकने के लिए सक्रिय भाजपा चुनाव प्रबंधन कांग्रेस में बागियों को मनाने की कोई तैयारी नहीं

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नाम वापसी के बाद उम्मीद्वारों की तस्वीर होगीं साफ

उज्जैन।नामांकन की जांच के बाद अब सभी की नजर कल 22जून को नाम वापसी पर हैं। 54 वार्डों में कांगे्रस और भाजपा के करीब 160 अनाधिकृत उम्मीदवार है,जो नाम वापस नहीं लेने और बी-फार्म जमा नहीं करने की स्थिति में निर्दलीय घोषित कर दिए जाएंगे।

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बगावत को रोकने के भाजपा चुनाव प्रबंधन समूह सक्रिय हो गया है,तो कांग्रेस में संगठन स्तर पर बागियों को मनाने की कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है।

नामांकन पत्रों की जांच व आपत्तियों के निराकरण के बाद पार्षद प्रत्याशियों की सूची से 22 नाम निरस्त किए हैं। अब सूची में 322 नाम रह गए है। 22 जून को नाम वापसी के बाद चुनाव लडऩे वालों की संख्या व तस्वीर स्पष्ट होगी।

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नामांकन पत्रों की जांच के बाद प्रत्याशियों की सूची में 322 नाम हैं। इनमें से करीब 160 ऐसे है जिन्होंने कांग्रेस-भाजपा की ओर से नामांकन जमा किया है,लेकिन पाटी्र की अधिकृत सूची में नहीं है।

नाम वापस नहीं लेने और पार्टी का बी-फार्म नहीं मिलने पर निर्वाचन अधिकारी द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा। नगर निगम चुनाव की गहमागहमी लगातार बढ़ती जा रही है।

भाजपा और कांग्रेस ने बिसात पर अपने मोहरे उतार दिए हैं,लेकिन उनके इस टिकट वितरण से जिन दावेदारों को टिकट नहीं मिला,उन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर अपनाकर मैदान में उतरने का निणर्य लिया है। इससे दोनों ही दलों के समीकरण बिगडऩे की संभावना है।

22 नामांकन निरस्त

नामांकन पत्रों की जांच व आपत्तियों के निराकरण के बाद वार्ड एक से भाजपा द्वारा घोषित रीना कोरट सहित तीन के फार्म निरस्त किए गए। इनके अलावा वार्ड 3 व 54 से भी तीन-तीन और वार्ड 11 और 47 से दो-दो, वार्ड 4, 8, 27, 33, 37, 39, 46, 50 व 53 से एक-एक फार्म निरस्त किए गए है।

मान-मनोव्वल होगी शुरू……..नगरीय निकाय चुनाव में पार्षद प्रत्याशियों के विरुद्ध कांग्रेस व भाजपा के ही बागियों ने पार्टी के सामने संकट खड़ा कर दिया है। अब पार्टी का चुनाव प्रबंधन समूह इन बागियों को मनाने में जुटा है। पार्टी की तैयारी है कि नामांकन वापसी के दिन तक इन बागियों को मना लिया जाए।

पार्टी ने अपने सभी जिला प्रभारियों से कहा है वे जिले के एक-एक निकाय के उन बागियों से बात करें, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ पर्चे भरे हों।गौरतलब है कि अप्रत्यक्ष चुनाव होने के कारण अध्यक्ष बनने की चाहत रखने वाले बहुत कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय नामांकन पत्र दाखिल किया है। इधर कांग्रेस में बागियों को मनाने की संगठन स्तर पर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है।

कांग्रेस के एक अधिकृत उम्मीदवार का कहना हे कि बागी को समझाने के लिए उम्मीदवार को ही प्रयास करना पड़ रहे है,वरिष्ठ नेता आश्वासन दे रहे है,लेकिन क्या करेंगे? यह बताने की स्थिति में नहीं है।

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