योग साधन नहीं संस्कृति है- शर्मा

उज्जैन। सनातन ज्ञान परंपरा में जीवन को अध्यात्म की ओर उन्मुख करना मुख्य उद्देश्य रहा है। भारतीय संस्कृति सदैव समाज व मनुष्य के उत्थान की प्रक्रिया को नियत करती है। भारतीय संस्कृति में योग का महत्वपूर्ण योगदान है। योग साधन नहीं संस्कृति है।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून के अवसर पर शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभारी प्राचार्य डॉ. सीमा शर्मा ने कही। योग के जीवन में महत्व को प्रतिपादित किया। विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों, कर्मचारियों द्वारा सूर्यनमस्कार, भुजंगासन, मंडुकासन, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम आदि योग किए गए। डॉ. यश शर्मा, डॉ. गणेशप्रसाद द्विवेदी, मनीष पंवार आदि ने योग में सहभागिता की।
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