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महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत…

1500 रु. के शुल्क से सीधे गर्भगृह में प्रवेश… आम भक्तों को झलक भी नहीं मिलती

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सशुल्क दर्शनवाले श्रद्धालुओं के गर्भगृह के सामने ऐसे खड़े होने से अन्य भक्तों को करना पड़ा इंतजार।

 

उज्जैन। महाकाल मंदिर के गर्भगृह में सशुल्क व्यवस्था और वीआईपी पांईट से प्रवेश करने वाले भक्तों के कारण आम श्रद्धालुओं की न केवल भावनाएं आहत हो रहीं है। साथ ही वे भगवान का जलाभिषेक करने से तो दूर,झलक पाने से भी वंचित है।

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महाकाल मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह में ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन-पूजन का सकें, इसके लिए मंदिर प्रबंध समिति टाइम मैनेजमेंट पर जोर दे रही है। गर्भगृह में भी कम से कम लोगों को प्रवेश देन के उद्देश्य से 1500 रु. की सशुल्क (दो व्यक्ति के लिए) नियम बना रखा है। इस दौरान आम श्रद्धालुओं को नंदीहॉल बेरिकेट्स के पीछे से भगवान के दर्शन कराए जाते है।

1500 रु. का शुल्क देने वालों को जलाभिषेक,फूल अर्पित करने का मौका मिल रहा है। इन दिनों सशुल्क गर्भगृह में जाकर जलाभिषेक करने वालों की संख्या कुछ अधिक है। इसके लिए 6-6 श्रद्धालुओं के समूह को गर्भगृह में प्रवेश दिया जा रहा है। हालात यह है कि सशुल्क को प्रवेश के लिए डेढ़ से दो घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

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वहीं गर्भगृह में भीड़ बनी रहती है। इस बीच वीआईपी पांईट से आने वाले भक्तों को भी बगैर रोक-टोक के गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है। ऐसी स्थिति में नंदीहॉल बेरिकेट्स के पीछे आम श्रद्धालु न केवल खुद को ठगा महसूस करता,साथ भगवान की एक झलक पाने से वंचित हो रहा है।

सभी के लिए शुल्क अनिवार्य किया जाए

महाकाल मंदिर में आम और खास में अंतर करना उचित नहीं है। गर्भगृह में सभी श्रद्धालुओं को सशुल्क प्रवेश दिया जाए। वीवीआईपी, वीआईपी, प्रोटोकॉल हो या आम श्रद्धालुओं सभी से शुल्क लेकर गर्भगृह में प्रवेश देना चाहिए। मंदिर प्रबंध समिति गर्भगृह में प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित करें।
पं. महेश पुजारी पूर्व सदस्य                                                                                             महाकाल मंदिर प्रबंध समिति

प्रवेश को लेकर भेदभाव

भीड़ का हवाला देकर आम श्रद्धालुओं का गर्भगृह में प्रवेश चाहे जब रोक दिया जाता है,लेकिन महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की नजर में सशुल्क व्यवस्था और वीआईपी पांईट वाले श्रद्धालुओं के लिए संख्या के कोई मायने नहीं रखती है। मंदिर समिति के ही एक कर्मचारी के मुताबिक गर्भगृह में सशुल्क प्रवेश का लाभ लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रहीं है। इसके कारण गर्भगृह हमेशा ही भीड़ बनी रहती है। इसमें वीआईपी प्राटोकॉल पांईट के भक्त भी शामिल होते है। आम श्रद्धालुओं से प्रवेश के लिए भेदभाव उचित नहीं है।

महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। भस्मआरती के अलावा सबसे ज्यादा संख्या में श्रद्धालु गर्भगृह में पूजन-अर्चन करना चाहते हैं। ऐसे में गर्भगृह में शुल्क देकर पूजन करने वालों की संख्या में बढ़ गई है। दरअसल भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 1500 रुपए की टिकट कटाकर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ही गर्भगृह में जाने की अनुमति दी है।

श्रद्धालु बड़े गणपति मंदिर के पास बने प्रोटोकॉल कार्यालय से रसीद लेकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। भीड़ के बढऩे की वजह से प्रोटोकॉल कार्यालय पर विवाद की स्थिति बनती है। 1500 की टिकट के लिए लाइन में लगे श्रद्धालुओं को भी प्रवेश के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वर्तमान में एक श्रद्धालु को जलाभिषेक, पूजन आदि में 10 से 15 मिनट लगते हैं।

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