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विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बीच फंसी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई

अभी तक स्कूलों में 40% कोर्स ही पूरा हुआ

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बीच कक्षा 10 और 12 के विद्यार्थियों की पढ़ाई फंसी हुई है। लोकसभा चुनाव की वजह से परीक्षा एक माह पहले फरवरी माह में आयोजित होगी, वहीं विधानसभा चुनाव की व्यस्तता की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इसका नतीजा यह है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जाने वाली कक्षा 10 और 12वीं की परीक्षा तक विद्यार्थियों का कोर्स पूरा होना भी मुश्किल है।

एमपी बोर्ड परीक्षा वाले स्कूलों में अभी तक 35 से 40 फीसदी तक ही कोर्स हुआ है, चुनाव और त्योहार की व्यस्तता की वजह से दिसंबर तक यह कोर्स पूरा हो पाएगा इसको लेकर अभी आशंका है। अगर कहीं यह कोर्स पूरा भी कर लिया जाता है तो भी पचास फीसदी कोर्स रह जाएगा वह फरवरी में होने वाली परीक्षा तक शायद ही पूरा हो पाए। हायर सेकंडरी और हाईस्कूल की परीक्षाएं शुरू होने से पहले विद्यार्थियों के लिए रेमेडियल क्लास शुरू की जाती थी, लेकिन अभी तक यह कक्षाएं भी स्कूलों में शुरू नहीं हुई हैं हालांकि इन कक्षाओं के लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग तो हो चुकी है। इन कक्षाओं में उन विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है जो पढ़ाई में कमजोर होते हैं, जिनका त्रैमासिक रिजल्ट कमजोर रहता है।

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इस रिजल्ट के बाद इन विद्यार्थियों के उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता है जिनमें यह कमजोर रहते हैं। रेमेडियल क्लास अभी शुरू नहीं हो पाई हैं, इसके बाद नवंबर में चुनाव और दीपावली का त्योहार है, ऐसे में कभी स्कूलों का अवकाश रहेगा, तो कभी शिक्षक ड्यूटी में रहेंगे और स्कूल भवनों में मतदान केंद्र बनेंगे। विद्यार्थियों की अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर पढ़ाई कराना भी इन हालातों में मुश्किल है। ऐसे में नवंबर माह में ज्यादा पढ़ाई होना संभव दिखाई नहीं देता है। दिसंबर में छमाही परीक्षा का आयोजन किया जाना है, इस माह का ज्यादातर हिस्सा, परीक्षा और मूल्यांकन में चला जाएगा। इसके बाद सिर्फ जनवरी माह ही बचता है जिसमें विद्यार्थियों का कोर्स भी पूरा कराना होगा, उनका रिवीजन भी कराना होगा।

पिछले सत्र का रिजल्ट बिगड़ा, पहले से तैयारी नहीं

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चुनाव पहले से ही तय था, एक माह पहले फरवरी में वार्षिक और दिसंबर में अर्द्धवार्षिक परीक्षा कराए जाने की घोषणा पहले कर दी गई थी। पिछले साल हायर सेकंडरी का रिजल्ट भी 45 फीसदी रहा था। इसको ध्यान में रखते हुए सत्र शुरू होने के साथ ही तैयारी शुरू कराई जाना चाहिए थी। अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जाना चाहिए थी, रेमेडियल कक्षाएं भी अक्टूबर के शुरुआत में आयोजित होना चाहिए थीं। लेकिन यह सब नहीं किया गया अब विद्यार्थियों की पढ़ाई फंस गई है।

प्री-बोर्ड परीक्षाओं पर भी संकट गहराया

स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षा का कन्सप्ट शुरू किया गया था, इसका उद्देश्य था छ: माही परीक्षा के बाद कोर्स पूरा कराया जाए और इसके बाद प्री-बोर्ड परीक्षा का आयोजन किया जाए। यह परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जाती थी, इसके मूल्यांकन में छात्रों में जो कमियां मिलती थीं उनको दुरुस्त कराया जाता था।

कोर्स पूरा कराने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएगी। इसकी व्यवस्था जल्द ही की जाएगी।
आनंद शर्मा, जिला
शिक्षा अधिकारी

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