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कैसे दूर होगा जलसंकट…10 माह में नहीं बिछा सके 550 मीटर लंबी लाइन

1.57 करोड़ रुपए की योजना, आम लोगों को नहीं मिला फायदा

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:पेयजल संकट की स्थिति से निपटने के लिए पीएचई ने उज्जैन शहर में नर्मदा का पानी पिलाने के लिए 1.57 करोड़ रुपए की योजना बनाई, ठेका भी दिया लेकिन 10 माह में भी 550 मीटर लंबी लाइन बिछा नहीं सके। नर्मदा लाइन से गऊघाट फिल्टर प्लांट जोडऩे के लिए यह योजना बनाई थी, लेकिन 10 माह गुजरने के बाद भी अब तक लाइन ही बिछा नहीं सके। अब गर्मी में फिर पेयजल संकट आया तो इस पर खर्च पैसा निजात नहीं दिला सकेगा।

शहर की प्यास बुझाने वाले गंभीर डेम का पानी तेजी से कम हो रहा है और तेज गर्मी के कारण पानी भाप बनकर उडऩे और खपत बढऩे से जलसंकट खड़ा हो सकता है। हालांकि नगर निगम प्रशासन ने अभी से एक दिन छोड़कर पेयजल प्रदान करना शुरू कर दिया है, लेकिन जून के आसपास पेयजल संकट परेशान कर सकता है।

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इस संकट की घड़ी में लोगों को नर्मदा का पानी पिलाने के लिए भूखीमाता मंदिर के पास लालपुल के नजदीक गऊघाट फिल्टर प्लांट से नर्मदा की लाइन को जोडऩे के लिए 550 मीटर की लाइन बिछाने के लिए योजना बनाई और एक कंपनी को ठेका भी दे दिया गया था। कंपनी को तीन माह में लाइन डालने का समय दिया गया था, किंतु अब तक लाइन ही पूरी तरह बिछाई नहीं जा सकी। मई 2023 में यह काम शुरू किया गया था।

अभी कहां कैसे आता है पानी

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गऊघाट पर तीन फिल्टर प्लांट हैं, जिनसे रोज करीब 18 एमजीडी पानी फिल्टर कर जलप्रदाय के लिए दिया जाता है। गंभीर डेम के पास अंबोदिया में भी एक फिल्टर प्लांट है, जहां से 12 एमजीडी पानी शहर को दिया जाता है। गऊघाट पर पानी लाने के लिए रॉ वाटर पाइप लाइन है। शिप्रा से पानी लेने के लिए गऊघाट के पास इंटकवेल है। शिप्रा में पानी नहीं रहने से इसका उपयोग तभी हो सकता है जब नर्मदा का पानी शिप्रा में भरा हो। नर्मदा का पानी त्रिवेणी से खुली नदी में आता है और गऊघाट पर जमा होता है।

नोटिस न कार्रवाई, कंपनी बेपरवाह…

गऊघाट फिल्टर प्लांट को नर्मदा की लाइन से जोडऩे के लिए कंपनी को 3 माह का समय दिया था। लाइन बिछाई नहीं जा सकी है। पीएचई ने ठेकेदार कंपनी को न नोटिस दिया न कोई कार्रवाई की। कंपनी भी इसे लेकर बेपरवाह हो गई है।

बड़ी चूक… एनवीडीए से परमिशन ही नहीं?

इस योजना में बड़ी चूक यह भी सामने आई है कि पीएचई ने एनवीडीए से लाइन जोडऩे की परमिशन ही नहीं ली और 1.57 करोड़ की योजना बना दी और टेंडर भी लगाकर ठेका दे दिया। अब एनवीडीए से परमिशन मिलने के बाद ही इस लाइन को जोड़ा जा सकेगा। इसी चूक के कारण प्रशासन अभी खामोश है।

यह है पूरी योजना

स्मार्ट सिटी ने गऊघाट फिल्टर प्लांट को नर्मदा पाइपलाइन से जोडऩे किए 1.57 करोड़ रुपए की योजना बनाई थी।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की नर्मदा शिप्रा लिंक बहुउद्देशीय योजना की 1400 एमएम लाइन चिंतामन ब्रिज तिराहे से गुजर रही है।

 चिंतामन ब्रिज से यह लाइन भूखीमाता रोड से गुजर रही गंभीर की गऊघाट रॉ वाटर लाने वाली लाइन से जोड़ी जाएगी।

जहां 1400 एमएम लाइन पर टी कनेक्शन है, वहां से 800 एमएम की लाइन बिछाने का काम शुरू किया था।

जब भी पानी की जरूरत होगी नर्मदा की लाइन से पानी गऊघाट आने वाली लाइन में छोड़ दिया जाएगा।

गऊघाट फिल्टर प्लांट को नर्मदा की लाइन से जोडऩे के लिए 550 मीटर लंबी लाइन बिछाने का काम चल रहा है। लाइन जुडऩे के बाद ही इसका उपयोग हो सकेगा।-एनके भास्कर, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

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