सोमवती अमावस्या…. सोमतीर्थ कुंड, शिप्रा नदी में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

मंदिरों की नगरी में पर्वों का उल्लास, कल से चैत्र नवरात्रि और नवसंवत्सर

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:मंदिरों की नगरी में पर्व और त्यौहार का उल्लास है। सोमवती अमावस्या पर्व पर सुबह उज्जैन में पर्व स्नान हुआ। शिप्रा में स्नान के लिए देशभर से आये लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। प्राचीन सोमतीर्थ पर भी फव्वारे लगाकर स्नान की व्यवस्था की थी,जहां श्रद्धालुओं ने विशेष मान्यताओं के चलते स्नान किया। स्नान-पूजन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा के तट पहुंचे। वहीं कल से कल से चैत्र नवरात्रि, नवसंवत्सर का शुभारंभ होगा।
सोमवती अमावस्या शिप्रा के रामघाट तथा सोमतीर्थ स्थित सोमकुंड में स्नान के बाद श्री सोमेश्वर महादेव के दर्शन का विधान है। मान्यता है सोमवती अमावस्या पर तीर्थ स्नान के बाद भगवान सोमेश्वर महादेव के दर्शन करने से अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है। साथ ही जन्म पत्रिका में मौजूद चंद्रमा के दोष समाप्त होते हैं।
नवसंवत्सर 2081 का आगाज कल
सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 9 अप्रेल को विक्रम संवत 2080 का स्वागत सूर्य को अघ्र्य प्रदान कर किया जाएगा। सुबह शिप्रा तट पर शंख, ढोल-नगाड़े व शहनाई की मंगल ध्वनि के साथ नगरवासी सूर्योदय की प्रथम किरण को अघ्र्य प्रदान करेंगे। संवत्सर सूक्त का पाठ किया जाएगा। घरों में गुड़ी व धर्म ध्वज का आरोहण होगा। मंगलवार को सुबह मंगल वाद्यों की मधुर ध्वनि के साथ सूर्य को अघ्र्य प्रदान कर हिंदू नववर्ष का स्वागत किया जाएगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सृष्टि के आरंभ का दिन है। इस दिन से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है।
घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्रि
चैत्र नवरात्रि नौ अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। मां दुर्गा का आगमन इस बार घोड़े पर होगा और हाथी पर सवार होकर प्रस्थान होगा। नवरात्र का प्रारंभ मंगलवार से होने के कारण मां दुर्गा घोड़ा पर सवार होकर आएंगी। पंचाग गणना के अनुसार घट स्थापना का मुहूर्त प्रात: 6.24 बजे से लेकर 10.28 बजे तक रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त में अमृतसिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का योग का बन रहा है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.03 बजे से शुरू होगा,जो कि 12.54 बजे तक रहेगा। अमृतसिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग नौ अप्रैल को प्रात: 07.32 बजे से लेकर पूरे दिन रहेगा।
52 कुंड में स्नान
भूतड़ी अमावस्या पर प्रेतबाधा से निवृत्ति के लिए केडी पैलेस स्थित शिप्रा के 52 कुंड में स्नान का महत्व है। मान्यता है बावन कुंड में स्नान तथा पूजा पाठ कराने से वायव्य दोष का निवारण होता है। जिन्हें प्रेत बाधा हो, वे इससे मुक्त हो जाते हैं। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोग अपने स्वजन को प्रेतबाधा से मुक्ति दिलाने के लिए यहां स्नान कराने लेकर आते हैं। रविवार को चौदस और सोमवार को अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोग 52 कुंड पहुंचे थे।
घाटों पर सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था
सोमवती अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के स्नान करने आने को लेकर शिप्रा नदी के रामघाट, भूखी माता, गऊघाट, सिद्धवट, सोमतीर्थ, मंगलनाथ, केडी पैलेस सहित शिप्रा के विभिन्न घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे। घाट पर एसडीईआरएफ एवं होमगार्ड के जवानों की टीम तैनात रही।
सिद्धवट : दुग्धाभिषेक, पितरों को तर्पण
चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि पर पितरों की शांति के लिए रविवार को हजारों लोगों ने सिद्धवट पहुंचकर शिप्रा नदी में स्नान के बाद भगवान सिद्धनाथ का पूजन-अर्चन कर दुग्धाभिषेक किया। वहीं शिप्रा तट के घाट पर पितरों की शांति के लिए तर्पण कार्य किए। पितरों के मोक्ष और शांति के लिए देशभर के हजारों श्रद्धालु चतुर्दशी और अमावस्या पर यहां पहुंचते हैं। सुबह से श्रद्धालुओं की कतार सिद्धवट पर लग चुकी थी। लोगों ने शिप्रा नदी में स्नान के बाद सिद्धनाथ भगवान का पूजन कर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण, कर्मकांड भी कराया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्धवट पहुंचे थे, जिसके कारण दिनभर रास्ते जाम होने की स्थिति बनी रही।









