विक्रम विवि उज्जैन का 28वां दीक्षांत समारोह

उपाधि उपदेश: स्वच्छता, पौधारोपण और सकारात्मकता की शपथ ली
राज्यपाल के हाथों विद्यार्थियों ने प्राप्त किए उपाधि-पदक
अक्षरविश्व न्यूज . उज्जैन:विक्रम विश्वविद्यालय का 28 वां दीक्षांत समारोह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा- गुड़ी पड़वा के पर्व पर मंगलवार को स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने राज्यपाल के हाथों उपाधि-पदक किए। दीक्षांत समारोह में पहली बार विद्यार्थियों को उपाधि ग्रहण करने पर उपदेश के साथ स्वच्छता रखने,वृक्षारोपण करने और सोशल मीडिया के नकारात्मक विचारों के संबंध में युवाओं को जागरूक करने की शपथ भी दिलाई गई। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि भारत मौसम विज्ञान विभाग,भारत सरकार के महानिदेशक डॉ मृत्युंजय उपाध्याय दीक्षांत भाषण दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित थे।
उपाधि पर कुलपति की जगह ‘कुलगुरु’ शब्द अंकित
विक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को दी गई उपाधियों (डिग्री) पर कुलपति की जगह ‘कुलगुरुÓ शब्द अंकित किया गया है। दीक्षांत समारोह में कुलगुरु द्वारा प्रमाणित डिग्रियां ही प्रदान की गई। उपाधि पर कुलपति की जगह ‘कुलगुरुÓ शब्द अंकित करने के संबंध में राजपत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि ‘विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में सर्वत्र शब्द कुलपति जहां कहीं भी हो के स्थान पर ‘कुलगुरु’ स्थापित किया जाए।
नाम परिवर्तित करने को शासन से आदेश मिला है। इसलिए डिग्रियों पर नाम परिवर्तित किया है। अंग्रेजी में नाम वाइस चांसलर ही रखने का आदेश मिला है। राजपत्र में भी यही लेख है। बता दें कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते कुलपति शब्द हटाकर कुलगुरु शब्द का प्रयोग करने का प्रस्ताव शासन को दिया था। मोहन यादव जब मुख्यमंत्री बने,तो उनके ही प्रयास से 13 फरवरी 2024 को इस बाबत राजपत्र में प्रकाशन भी हुआ।
107 पीएचडी शोधकर्ता
दीक्षांत समारोह में 107 पीएचडी शोधकर्ता और 77 स्नातक एवं स्नातकोत्तर गोल्ड मेडल प्राप्तकर्ता विद्यार्थी शामिल हुए। समारोह में वर्ष 2023 के पीएचडी उपाधि धारकों को डिग्री और 2023 की स्नातक परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
वर्ष 2023 की स्नातकोत्तर परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए। विद्यार्थियों के लिए परंपरागत गणवेश निर्धारित किया गया था। इसके तहत उपाधि-पदक धारक विद्यार्थियों में छात्राओं ने ऑफ व्हाईट या क्रीम साड़ी अथवा सलवार सूट तथा छात्रों के लिए ऑफ व्हाईट या क्रीम का कुर्ता- पायजामा पहना था।









