नगर निगम ने करोड़ों रुपये लगाकर किया राणोजी की छत्री का सौंदर्यीकरण

ट्रस्ट ने उद्यान में पार्किंग का ठेका दे दिया
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:ऐतिहासिक महत्व की रामघाट स्थित राणौजी की छत्री और उसके पीछे रामानुजकोट मार्ग की तरफ खुले स्थान पर नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर सिंहस्थ के पूर्व सौंदर्यीकरण किया गया था। इस जगह वर्तमान में वाहन पार्किंग संचालित हो रहा है। सवाल यह कि नगर निगम ने ट्रस्ट की जमीन पर करोड़ों रुपये क्यों खर्च किये।
रामानुजकोट के सामने से बंबई वाले की धर्मशाला से लगी राणोजी की छत्री का खुला स्थान है, जबकि शिप्रा नदी की तरफ राणोजी की छत्री का आकर्षक निर्माण वर्षों पुराना है। इस पूरे क्षेत्र का कब्जा वर्तमान में सिंधिया ट्रस्ट के पास है। सिंहस्थ महापर्व के पूर्व नगर निगम द्वारा राणोजी की छत्री और उसके पीछे खुले स्थान का सौंदर्यीकरण कार्य करोड़ों रुपयों की लागत से किया गया।
यहां पर नक्काशीदार लाल पत्थरों को लगाया गया। उद्यान को विकसित किया गया, स्टील की रेलिंग आदि कार्य भी कराये गये। नगर निगम की जानकारी के मुताबिक उस दौरान सौंदर्यीकरण कार्य में 2 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय किया गया था। हालांकि सिंहस्थ में इस जगह का उपयोग पुलिस कंट्रोल रूम और वीआईपी के लिये किया गया था। सिंहस्थ के बाद नगर निगम ने राणोजी की छत्री की हालत जानने का प्रयास नहीं किया।
परिणाम यह रहा कि करोड़ों रुपयों की लागत से लगे लाल पत्थर टूटने लगे और रेलिंग भी उखड़ गई। खास बात यह कि राणोजी की छत्री और उसके आसपास खुले स्थान का कब्जा सिंधिया ट्रस्ट के पास है और अब ट्रस्ट द्वारा उक्त खुले स्थान को एग्रीमेंट के आधार पर एक व्यक्ति को वाहन पार्किंग के लिये ठेके पर दे दिया गया है। वर्तमान में यहां दो पहिया, चार पहिया वाहन ठेकेदार द्वारा खड़े कराने के साथ ही मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है।
वाहन पार्किंग का मनमाना शुल्क
ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा वाहन पार्किंग का होर्डिंग लगाकर रसीद भी बनाई गई है। जिसमें दो पहिया वाहन पार्किंग का शुल्क 20 रुपये रखा गया है, जबकि अन्य अलग-अलग वाहनों के शुल्क भी इससे अधिक निर्धारित किये गये हैं।
मैंने दौरा कर एसडीएम को अवगत कराया है
मुझे राणोजी की छत्री के खुले क्षेत्र में वाहन पार्किंग संचालित होने व यहां लगे लाल पत्थर उखडऩे की जानकारी मिली थी। चार-पांच दिन पहले मैंने वहां पहुंचकर दौरा किया था। नगर निगम अफसरों को लाल पत्थर फिर से लगाने के निर्देश दिये थे। उक्त जगह का अधिपत्य सिंधिया ट्रस्ट के पास है इस कारण वाहन पार्किंग मामले में नगर निगम हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे एसडीएम को अवगत कराया गया है। पुरातत्व महत्व की राणोजी की छत्री का संरक्षण नगर निगम द्वारा किया जाता है। सिंहस्थ मद से उक्त स्थान पर निर्माण कार्य कराया गया था जिसकी एजेंसी नगर निगम थी। – मुकेश टटवाल, महापौर
नगर निगम के इन अफसरों ने कराया था निर्माण कार्य
नगर निगम के अफसरों ने राणोजी की छत्री की मरम्मत, लाईटिंग, फ्लोरिंग, बाउण्ड्रीवॉल निर्माण के नाम पर यहां 2 करोड़ 54 लाख रुपये के निर्माण कार्य कराये थे। उस समय नगर निगम में उपायुक्त एस.एन. मिश्रा, कार्यपालन यंत्री आरबी शर्मा, सहायक यंत्री पीयूष भार्गव, उपयंत्री योगेन्द्र गंगराड़े थे जबकि निर्माण कार्य का ठेका विमलचंद जैन को दिया गया ।
राणोजी की छत्री के खुले स्थान का ठेका वाहन पार्किंग के लिये अक्षय व्यास को 11 माह के एग्रीमेंट पर 25 हजार रुपये में दिया गया है। इस स्थान पर वाहन खड़े करने का शुल्क उसी के द्वारा निर्धारित किया जाना है।-अजय ढाकने, अधीक्षक सिंधिया ट्रस्ट उज्जैन









