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अनोखी भक्ति… 114 दिन में 1227 KM का सफर तय कर पहुंचे भगवान महाकाल के दरबार

12 ज्योतिर्लिंग और चारधाम की दंडवत यात्रा पर पथिक मुनि

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सुबह 5.30 से 11 बजे तक करते हैं दंडवत यात्रा, फिर अपने ही वाहन में रहते हैं

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। हर किसी की भक्ति का अनोखा तरीका होता है। कोई पहाड़ों में तपस्या करता है तो कोई पैदल तीर्थयात्रा करता है लेकिन राजकोट के पथिक मुनि की आस्था अनोखी है। वह १२ ज्योतिर्लिंग और चारधाम की यात्रा कर रहे हैं जिसमें वह हर सुख-सुविधा को त्याग कर केवल अपने विश्वास, श्रद्धा और समर्पण के सहारे आगे बढ़ रहे हैं।

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दअसल, मन में आस्था हो तो हर कठिनाई आसान हो जाती है। भगवान शिव की ऐसी भक्ति को अपने हृदय में संजोए उनके अनन्य भक्त पथिक मुनि दंडवत यात्रा करते हुए रविवार को भगवान महाकाल के दर्शन करने उज्जैन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 1227 किमी का सफर तय किया जिसमें 114 दिन का समय लगा। 12 ज्योतिर्लिंग और चारधाम की दंडवत यात्रा पर निकले पथिक मुनि ने 28 अक्टूबर 2023 से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी।

राजकोट (गुजरात) जिले के ग्राम ढांक स्थित डूंगेश्वर महादेव मंदिर में रहने वाले पथिक मुनि का पहला पड़ाव सोमनाथ था। 130 किलोमीटर की दंडवत यात्रा करते हुए वह 30 दिसंबर 2023 को सोमनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान के दर्शन किए। इसके बाद वहां से 230 किमी दूर द्वारका के लिए यात्रा की निकले। पोरबंदर पहुंचकर उन्होंने कुछड़ी स्थित खीमेश्वर महादेव मंदिर में 8 अप्रैल 2024 से 18 मई 2024तक 41 दिन तक पंच धूनी साधना की। इसके बाद दंडवत करते हुए पथिक मुनि ने ६ जून २०२४ को द्वारका पहुंचकर भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए। इसके पश्चात 17 किमी दूर दारूकावन स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग 14 जून को पहुंचे। इसके बाद करीब 850 किमी की दंडवत यात्रा करते हुए पथिक मुनि हिंदू नववर्ष पर रविवार को उज्जैन पहुंचे और बाबा के दर्शन किए। अगला पड़ाव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है जिसके लिए वह सोमवार को निकले।

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सुबह 5.30 बजे से शुरुआत

इंदौर रोड पर अक्षर विश्व से विशेष बातचीत में पथिक मुनि ने बताया कि अभी गर्मी के चलते वर्तमान में वह सुबह 5.30 से 11 बजे तक साढ़े पांच घंटे यात्रा करते हैं। इस दौरान करीब ३ किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इसके बाद उनके पास छोटा हाथी वाहन है, उसी में रहते हैं। अगले दिन फिर वहीं से यात्रा की शुरुआत करते हैं जहां से खत्म की है। उनका कहना है कि यह भगवान शिव की भक्ति का ही बल है जो उनमें ऊर्जा का संचार करता है और आगे बढऩे के लिए प्रेरित करता है।

मप्र के पन्ना के रहने वाले

35 वर्षीय पथिक मुनि मूलत: मप्र के पन्ना के रहने वाले हैं और अविवाहित हैं। प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं हुई। परिवार में माता-पिता के अलावा उनके दो बड़े भाई, एक बड़ी और एक छोटी बहन है। वर्ष 2006 में पथिक मुनि ने दीक्षा ली और घर से निकले पड़े। इस दौरान उन्होंने सबसे कठिन मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी की। भगवान शिव के अनन्य भक्त पथिक मुनि ने इसी दौरान 12 ज्योतिर्लिंग और चारधाम की दंडवत यात्रा करने का संकल्प लिया था।

क्या परिवार की याद आती है और उनसे मिलने जाते हैं या फिर वे उनसे मिलने आते हैं, के सवाल पर उन्होंने बताया कि ना तो उन्होंने घर छोड़ा है और ना ही पकड़ा है। वह अपने परिवार से उसी तरह मिलते हैं जिस तरह अन्य लोगों से मिलते हैं। परिवार के लोग भी उनसे मिलने के लिए आते रहते हैं।

बाबा केदार के दर्शन के साथ समापन: पथिक मुनि इंदौर होते हुए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। इसके बाद महाराष्ट्र की ओर रवाना होंगे। यहां तीन ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद रामेश्वरम् के लिए रवाना होंगे। अंत में भगवान केदारनाथ के दर्शन के साथ यात्रा का समापन होगा। पथिक मुनि 12 साल की इस पूरी दंडवत यात्रा में करीब 10 हजार किमी का सफर तय करेंगे।

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