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सारस्वत साधना के गगन में दैदीप्यमान नक्षत्र थे निगम

निगम के दशमपुष्प पुण्य स्मरण दिवस पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. मोहन गुप्त ने कहा

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चौरसिया बोले- निगम विद्वान के साथ विनम्रता के धनी थे

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कीर्तिशेष डॉ. श्यामसुंदर निगम एक विलक्षण प्रतिभा, दैवी जीवटता तथा आर्श तितिक्षा के धनी, स्वनामधन्य विद्या-व्यसनी, मां वाग्देवी के आराधक, गृहस्थ की वेशभूषा में योगी और सारस्वत साधना के गगन में एक दैदीप्यमान नक्षत्र के रूप में आज भी विद्यमान हैं।

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यह विचार पूर्व संभागायुक्त डॉ. मोहन गुप्त ने डॉ. श्याम सुंदर निगम के पुण्य स्मरण समारोह में अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। मुख्य अतिथि डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि विद्वान तो बहुत देखे हैं किंतु, उनके जैसा कोई नहीं। वे विद्वान के साथ विनम्रता के धनी थे। अहंकार उन्हें स्पर्श नहीं कर पाया। संचालन प्रो. बालकृष्ण कुमावत ने किया। उन्होंने अपनी 4 दशकों पुरानी दोस्ती की नजीर देते हुए कहा कि ‘तेरा इश्क मैं कैसे छोड़ दंू, मुझे उम्र भर की तलाश है।’

कायस्थ समाज की ओर से स्नेहलता निगम का अमित श्रीवास्तव ने सम्मान किया। द्वीप प्रज्ज्वलन के समय पं. राजेन्द्र व्यास ने मंगलाचरण किया। बेटी आरना चित्रांश निगम ने सभी अतिथियों का स्वागत यश तिलक लगाकर किया। सुरेंद्र स्वर्णकार ने बांसुरी की धुन पर गुरु वंदना प्रस्तुत की।

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यह थे उपस्थित- सूर्यभान गुप्ता, डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा, पुष्पा चौरसिया, उर्मि शर्मा ने संस्मरण सुनाए। इस अवसर पर युधिष्ठिर कुलश्रेष्ठ, निखिलेश खरे, भरत सक्सेना, गोपालकृष्ण निगम व सुधीर निगम, शैलजा निगम, श्वेतिमा निगम, शुभ्रचंद्र शुक्ला, यूएस छाबड़ा, आनंदीलाल जोशी, केशव पंड्या, मानसिंह खराड़ी, संतोष सुपेकर, डॉ. महेश श्रीवास्तव, डॉ. प्रवीण जोशी, विनोद निगम, गोपालकृष्ण निगम आदि मौजूद थे।

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