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आवक कम होते ही बढ़ गए सब्जियों के दाम

बारिश में महंगी हो गई सब्जियां

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रसोई घर का बजट बिगड़ा

सब्जी भावों में समानता नहीं

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सीजन की सब्जी सबसे महंगी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। बारिश से मौसम बेशक खुशनुमा हो गया हो लेकिन इस मौसम में सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। रसोई घर का बजट भाव से गड़बड़ा गया है। भाव इतने ऊंचे है कि सब्जी मध्यमवर्गीय परिवार से लगभग दूर होने लगी है। यही कारण है कि मंडियों में उठाव नहीं हो पा रहा है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि इस समय सब्जी तो अच्छी आ रही है लेकिन खेतों में जल भराव के कारण यह मंडी तक नहीं पहुंच पा रही है। इस वजह से भाव ऊंचे चल रहे हैं। जब खेतों तक पहुंचना आसान हो जाएगा तब सब्जी के दामों में कमी आने की संभावना बनेगी। फिलहाल भाव यही रहने की उम्मीद है।

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खेतों में मौसमी सब्जियों की आवक बहुत है। इसी मौसम में कुछ सब्जियां ज्यादातर आती हैं। लेकिन बारिश के कारण वह लोगों तक नहीं पहुंच पाती है। बाजार में सब्जियों के दाम में भी एकरूपता नहीं है। कृषि उपज मंडी में सब्जियों के दाम अलग हैं। मक्सी रोड स्थित सब्जी मंडी में बिकने वाली सब्जियों के भाव अलग हैं। इसके अलावा ठेलों पर बिकने वाली सब्जियों के भाव तो बहुत ही अलग हैं।

मैथी का सफर 160 से 200 तक
वर्तमान में मैथी बहुत अच्छी आ रही है। ऐसा कहा जाता है कि बारीक मैथी का स्वाद बहुत अच्छा रहता है। बाजार में मैथी खरीदना आम लोगों के बस की बात नहीं है। इसका भाव 160 से लेकर 200 रुपए प्रतिकिलो है। यही मैथी जब थोड़ी पुरानी हो जाएगी तब 20 रुपए किलो भी कोई नहीं पूछेगा।

सुरजने की फली 200 रुपए किलो
आयुर्वेद में सुरजने की फली को बहुत ताकतवर बताया गया है। वेद्यो का कहना है कि सुरजने की फली दर्द निवारक और शक्तिवर्धक होती है। इसकी सब्जी भी बहुत अच्छी बनती है। इस फली का भाव बाजार में 50 रुपए पावभर यानी 200 रुपए किलो है।

10 वाला टमाटर  50 हो गया
बारिश के पहले टमाटर की बुरी गत हो रही थी। बाजार में खरीददार नहीं थे। कई किसानों ने तो इसे सडक़ पर फेंक दिया था। पिछले साल टमाटर 200 से 250 रुपए किलो तक बिका था। इस बार किसानों ने ज्यादा लगाया था। टमाटर के खरीददार नहीं मिले। नतीजतन वह १० रुपए किलो तक बिका। अभी अच्छा टमाटर 50 रुपए किलो बिक रहा है।

हरी सब्जी भी आसमान ताक रही है
अन्य सब्जियों की बात करें तो गिलकी के भाव चढ़ गए हैं। 40 रुपए किलो बिकने वाली गिलकी 100 रुपए किलो तक पहुंच गई है। कद्दू बाजार में सबसे ज्यादा सस्ता बिकता है, सिर्फ श्राद्ध के समय इसकी पूछपरख होती है। आम दिनों में यह 15 से 20 रुपए किलो में मिल जाता है। अभी यह 60 रुपए किलो तक बिक रहा है। इसी प्रकार हरी मिर्च भी 80 से 100 रुपए किलो तक हो गई है। हरा धनिया 10 रुपए का 50 ग्राम मिल रहा है। कटहल मूलत: बिहार और उत्तरप्रदेश से आता है। पिछले दो-तीन महीनों से यह 60 रुपए किलो से नीचे नहीं उतर रहा है।

सब्जी की आवक: उज्जैन में सब्जी मूलत: ग्रामीण क्षेत्रों से आती है। इनमें नरवर के आसपास के गांव, बडऩगर, घट्टिया, घोंसला, उन्हेल, सांवेर, तराना आदि शामिल हैं।

बाजार व्यवस्था: सब्जी किसानों के माध्यम से कृषि उपज मंडी स्थित सब्जी मंडी आती है। यहां दलालों के माध्यम से बोली लगती है। कुछ विक्रेता खुले तौर पर भी सब्जी बेचते हैं, जबकि छोटी मंडियों में सब्जी यहीं से जाती है। सब्जियों के भाव दलाल और बड़े खरीददार तय करते हैं।

सब्जी विक्रेता जिनसे चर्चा की गई
(नरेंद्र कुमार, सौरभ, राहुल माली, जितेंद्र कुमार, सावित्री बाई, सरस्वती बाई, कान्हा और जमुना देवी)

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