Advertisement

भारतीय भाषाओं के संरक्षण की कार्यशाला के आमंत्रण पत्र तक अंग्रेजी में छपे

दो किताबों का विमोचन दोनों ही अंग्रेजी में

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Advertisement

उज्जैन। प्रधानमंत्री एक्सीलेंस माधव कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार चर्चा में आ गया है। वजह है भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए आयोजित हो रहे इस कार्यशाला के आमंत्रण पत्र, जिसे भारतीय भाषा में नहीं बल्कि अंग्रेजी में छापा गया है। कार्यशाला में पहले दिन दो पुस्तकों का विमोचन हुआ, दोनों ही अंग्रेजी में छपी है। कार्यशाला से जुड़े जितने भी पत्र व्यवहार हुए सभी अंग्रेजी में थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय व भारतीय भाषा परिवार के संयुक्त प्रयास से आयोजित कार्यशाला की मंगलवार को शुरुआत हुई।

पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित, महर्षि पाणिनि संस्कृत विवि के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्रा, राज्य शिक्षा आयुक्त मनोज कुमार श्रीवास्तव और कुशाभाऊ ठाकरे विवि के कुलगुरु प्रो. बलदेव शर्मा बतौर अतिथि शामिल हुए। बकायदा 10 बिंदुओं के जरिए आमंत्रण पत्र में अंग्रेजी भाषा में इस सेमिनार के उद्देश्य प्रकाशित किए गए। उद्देश्य इस बात को लेकर थे कि भारतीय भाषाओं का संरक्षण किस तरह से किया जाए। डॉ. जफर मेहमूद ने बताया आमंत्रण पत्र दिल्ली से ही छपकर आए हैं, अधिकांश पत्र व्यवहार भी अंग्रेजी में ही हुआ है, इसकी मुख्य वजह यह है कि मुख्य आयोजनकर्ताओं ने अंग्रेजी को ही मूल भाषा माना है।

Advertisement

इन विषयों पर मंथन

भारतीय भाषाओं की सामान्य भाषाई विशेषताएं

Advertisement

विविधता और ज्ञान : भारत में भाषाई विविधता पर एक सैद्धांतिक प्रस्ताव

गहन बहुभाषावाद और सभ्यतागत जड़ें

भाषाई विरासत और विऔपनिवेशीकरण

अनुवाद के माध्यम से भारतीय भाषाओं को जोडऩा

भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता का विचार: एक समाजभाषावैज्ञानिक चिंतन

पाठ्य प्रसारण में लोक विविधताएं

मातृभाषा का महत्व : नीति और व्यवहार के माध्यम से भाषाई विविधता का पुनरुद्धार

संस्कृत की पुरातन स्थिति

भाषाई एकता की ऐतिहासिक और सभ्यतागत जड़ें

Related Articles

Write a review