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श्याम गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष ने पात्र सदस्य का प्लॉट अपनी बहन के नाम किया

उज्जैन। शहर की गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं में प्लॉटों की बंदरबांट का एक और काला अध्याय सामने आया है। नीलगंगा पुलिस ने श्याम गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष धीरज गौभुज और उनकी बहन विनीता गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
लंबी चली तकनीकी जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि अध्यक्ष ने पद का दुरुपयोग करते हुए एक पात्र सदस्य के भूखंड को नियमों को ताक पर रखकर अपनी सगी बहन के नाम ट्रांसफर कर दिया।

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पुलिस के अनुसार, संस्था के सदस्य लक्ष्य शर्मा को मालनवासा स्थित त्रिवेणी विहार (शिप्रा विहार योजना) में सीनियर एलआईजी श्रेणी का प्लॉट आवंटित था। शर्मा ने प्लॉट की पूरी राशि जमा कर दी थी और उनके पक्ष में उपभोक्ता फोरम का आदेश भी था। इसके बावजूद, अध्यक्ष धीरज गौभुज ने अदालती आदेशों को दरकिनार करते हुए 26 मई 2025 को एक फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने अपनी बहन विनीता गुप्ता के नाम प्लाट की रजिस्ट्री कर दी, जबकि विनीता न तो संस्था की सदस्य थी और न ही प्लॉट की पात्र।

यूडीए और संस्था प्रबंधक भी जांच के घेरे में
इस घोटाले की जांच उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) तक भी पहुंच रही है। पुलिस को शक है कि रजिस्ट्री के दौरान तथ्यों को छिपाने में यूडीए के कर्मचारियों और संस्था के प्रबंधक ने मिलीभगत की है। इस पूरे मामले में संस्था प्रबंधक शिवचरण शर्मा और यूडीए कर्मचारी संजय व्यास की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जल्द ही इन पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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परिजनों को ही बनाया गवाह
जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री के दौरान राजस्व की क्षति पहुंचाने और धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से धीरज ने अपने परिजनों को ही गवाह बनाया। इस खुलासे के बाद संस्था के अन्य सदस्यों में हड़कंप है। आशंका है कि ऐसे 8 से 10 और प्लॉट हैं जिन्हें पात्र सदस्यों के बजाय परिचितों के नाम किया गया है। इधर, उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए विवादित रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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