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पूर्व शिक्षा अधिकारी को चुनौती भारी पड़ी, दोषी करार

अनुकंपा नियुक्ति में अड़ंगा लगाने पर इंदौर हाईकोर्ट में दोषी करार, 10 मार्च को होगी सजा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इंदौर हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में अदालती आदेश की अनदेखी करने पर उज्जैन के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) आनंद शर्मा को अवमानना का दोषी पाया है।

जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद नई शर्तें थोपना न्यायपालिका के अधिकार को चुनौती देने के समान है। अब अदालत 10 मार्च को दोषी अधिकारी की सजा पर अपना फैसला सुनाएगी।
यह है मामला: बडऩगर निवासी चेतन सिंह ने अपने पिता के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

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विभाग ने 9 फरवरी 2023 को उन्हें प्रयोगशाला शिक्षक के पद पर नियुक्त किया, लेकिन अगले ही दिन उनकी नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास नहीं की है। चेतन ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर 11 अगस्त 2023 को सुनवाई करते हुए अदालत ने नियुक्ति निरस्त करने के आदेश को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि अनुकंपा नियुक्ति में टीईटी की अनिवार्यता नहीं है और विभाग को इस नियम में शिथिलता देने का अधिकार है। साथ ही यह भी कहा था कि पूर्व में बिना टीईटी पास नियुक्त शिक्षकों को भी प्रयोगशाला शिक्षक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी गई है।

अदालत के आदेश की अवहेलना

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हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में तत्कालीन डीईओ आनंद शर्मा ने 15 मार्च 2024 को फिर से आदेश जारी किया, लेकिन इसमें एक नई शर्त जोड़ दी कि चेतन को तीन साल के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इस शर्त को चेतन सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए दोबारा अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि जब टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा पहले ही स्पष्ट हो चुका था, तब ऐसी शर्त लगाना जानबूझकर की गई अवमानना है।

कोर्ट ने की तीखी टिप्पणी-मनमानीपूर्ण रवैया अपना रहे अधिकारी
अदालत ने टिप्पणी की कि चूंकि पुरानी नियुक्ति निरस्तीकरण का आदेश पहले ही रद्द किया जा चुका था, इसलिए याचिकाकर्ता की नियुक्ति स्वत: बहाल मानी जानी चाहिए थी। इसके बावजूद नया आदेश जारी कर शर्त लगाना अधिकारी की मनमानी को दर्शाता है। गौरतलब है कि आनंद शर्मा को अप्रैल 2024 में उज्जैन कलेक्टर द्वारा निजी स्कूलों में अव्यवस्थाओं के चलते पद से हटाया गया था। अब 10 मार्च को होने वाली सुनवाई में शर्मा सजा को लेकर अपना पक्ष रख सकेंगे।

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