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शिप्रा की हालत दयनीय, एनजीटी टीम ने देखी स्थिति, 10 को सुनवाई

त्रिवेणी से लेकर भैरवगढ़ क्षेत्र तक कटते दिखे पेड़, वीडियो भी बनाए

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पुण्यसलिला शिप्रा नदी के तट पर 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व में 30 करोड़ लोगों के डुबकी लगाने की तैयारी की जा रही है लेकिन फिलहाल नदी की स्थिति दयनीय है। यह जानकरी लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की टीम भोपाल लौट गई है। 10 मार्च को एनजीटी में इस मसले की सुनवाई होनी है। इस सुनवाई से पहले एनजीटी और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के संयुक्त जांच दल उज्जैन के प्रमुख घाटों का निरीक्षण किया। दल ने पाया कि नदी किनारे के पुराने पेड़ों की कटाई हो रही है, कई स्थानों पर मल-मूत्र नदी में निर्बाध मिल रहा है।

दरअसल, 6 जनवरी को एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने शिप्रा नदी की दुर्दशा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए संयुक्त प्रशासनिक दल का गठन किया था। इस दल में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, भोपाल के वैज्ञानिक डॉ. अनूप चतुर्वेदी, मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट एंड फारेस्ट, क्लाइमेट चेंज, रीजनल ऑफिस, भोपाल के राजशेखर रेड्डी और एप्को, भोपाल के सहायक साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. मनोज विश्वकर्मा शामिल थे। दो दिन पहले पहुंची टीम ने दिनभर शिप्रा नदी के अलग-अलग पॉइंट पर पहुंचकर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। दल ने बाकायदा एक-एक हिस्से की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी करवाई। इस पूरे मामले को एनजीटी तक ले जाने वाली वादी रमेशचंद्र द्विवेदी भी जांच दल के साथ थे।

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सीवरेज का पानी नदी में मिलता दिखा टीम को

जांच दल ने खुद मौके पर पाया कि गंगा घाट के समक्ष 50 साल से भी ज्यादा पुराने, हरे-भरे और छायादार पेड़ों को मशीनों के माध्यम से काटा जा रहा था। वाल्मीकि धाम, ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर के पीछे सीवर जल नदी में मिल रहा है. भैरवगढ़ क्षेत्र में दिल्ली दरवाजे के समीप भैरवगढ़ प्रिंट तैयार करने वाले कारखानों का दूषित पानी नदी में मिल रहा है।

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दल ने शिप्रा नदी पर बन रहे २९ किलोमीटर लंबे घाट का काम भी देखा और यह बन रही 7 फीट ऊंची रिटेनिंग वॉल्स से बारिश के दिनों में नदी को होने वाले नुकसान का आंकलन भी किया। दल ने राम घाट, नृसिंह घाट, गऊघाट, त्रिवेणी घाट क्षेत्र में भी शिप्रा की वास्तविक स्थिति भी देखी। वह अपनी रिपोर्ट जल्दी ही एनजीटी को देंगे। अपर कलेक्टर शाश्वत शर्मा ने बताया कि एनजीटी द्वारा गठित टीम ने मौका मुआयना किया है। रिपोर्ट भी तैयार की है। वह अपनी रिपोर्ट सीधे एनजीटी में समिट करेंगे।

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