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सिंहस्थ : समय सीमा, प्राथमिकता, सही निर्णय और बेहतर क्रियान्वयन की जरूरत

सिं हस्थ का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता में सिंहस्थ है, मुख्यमंत्री गंभीर हैं, इसीलिए सिंहस्थ तैयारी की भी समीक्षा होना चाहिए।

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रविवार को उज्जैन आए एसीएस और उज्जैन कलेक्टर रहे राजेश राजौरा सिंहस्थ निर्माण कार्यों और प्रबंधन की कैसे समीक्षा करते हैं यह दिलचस्प होगा। नगर निगम के सड़क चौड़ीकरण कार्यों की स्थिति चिंताजनक है, हालांकि संभागायुक्त आशीष सिंह एवं कलेक्टर रौशन सिंह रोजाना निरीक्षण कर रहे हैं। दरअसल निगम में इंजीनियर कम और उपायुक्त और सहायक आयुक्त ज्यादा हैं। इससे प्रबंधकीय संतुलन गड़बड़ा गया है। सिंहस्थ के कार्यो खासकर चौड़ीकरण और ब्रिज निर्माण के लिए जिस तकनीकी दक्षता की जरूरत है उसके अनुरूप इंजीनियर नहीं है।

इन्फ्र्रा क्षेत्र में तकनीकी और उपकरणों के लिए जिस पेशेगत योग्यता की आवश्यकता है उस पर ध्यान देने और उनकी पूर्ति तत्काल करना जरूरी है। राजौरा मुखर हैं। उनकी नजरों से यह कमियां बच नहीं पाएंगी, सवाल यह है कि समीक्षा में केवल कागजी प्रस्तुति और पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन को ही न देखा जाए, प्रत्येक काम की शुरुआत, टेंडर अलॉटमेंट, कार्य प्रारंभ होने की तिथि और समयसीमा, अब तक की स्थिति, कार्यो की गुणवत्ता, देरी का कारण और अन्य समीक्षा की जानी चाहिए। सिंहस्थ 2028 की तुलना प्रयागराज महाकुंभ से होना लाज़मी है, इसलिए सिंहस्थ की ब्रांडिंग, मुख्यमंत्री की इमेज बिल्डिंग और सिंहस्थ के लिए सकारात्मक विमर्श निर्माण की भी समीक्षा जरूरी है।

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बहरहाल डॉ. राजेश राजौरा अपने अनुभव और विवेक सम्मत बुद्धिमत्ता से सिंहस्थ 2028 के कार्यो की समग्र और सूक्ष्म समीक्षा करेंगे ऐसी आशा की जानी चाहिए।

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