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चिकित्सा जगत में ऐतिहासिक उपलब्धि : आरडी गार्डी में हुआ पहला सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

12 वर्षीय बालक ने हौसले से दी कैंसर को मात

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। धर्म और संस्कृति की नगरी उज्जैन ने अब चिकित्सा के क्षेत्र में भी एक नया इतिहास रच दिया है। जिले के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में पहली बार सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) किया गया है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी और हेमेटो-ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने तराना तहसील के ग्राम झुमकी निवासी एक 12 वर्षीय बालक का सफल प्रत्यारोपण कर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाला है।

जिले में इस तरह की यह पहली और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। झुमकी निवासी यह बालक वर्ष 2022 से एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिम्फोमा जैसे गंभीर कैंसर से जूझ रहा था। मासूम को इस बीमारी से बचाने के लिए पूर्व में दो बार
कीमोथैरेपी दी गई थी। जब दूसरी कीमोथैरेपी के बाद बीमारी पर नियंत्रण पाया गया, तब डॉक्टरों ने इसे बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सबसे सटीक समय बताया।

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स्वयं के स्टेम सेल से संभव हुआ इलाज

डॉ. चितलकर और डॉ. प्रियेश दुबे के नेतृत्व वाली मेडिकल टीम ने इस जटिल मेडिकल प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया। डॉक्टरों ने सबसे पहले बालक के शरीर से स्टेम सेल निकालकर उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित किया। इसके बाद बालक को हाई-डोज़ कीमोथैरेपी दी गई और फिर सुरक्षित किए गए स्टेम सेल्स को वापस मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। यह प्रक्रिया काफी संवेदनशील थी जिसमें डॉक्टरों की विशेषज्ञता ने अहम भूमिका निभाई।

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कीटाणु-रहित कमरे में 20 दिन की कड़ी निगरानी: ट्रांसप्लांट के बाद की प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण थी। डॉक्टरों के अनुसार, स्टेम सेल प्रत्यारोपित करने के बाद संक्रमण का खतरा बहुत अधिक रहता है जिससे मरीज की जान को जोखिम हो सकता है। इससे बचाव के लिए बालक को लगातार 20 दिनों तक एक विशेष कीटाणुरहित (स्टेराइल) कमरे में रखा गया। इस दौरान विशेषज्ञों की टीम ने पल-पल की निगरानी की और अंतत: 20 दिन के संघर्ष के बाद बालक पूरी तरह स्वस्थ हो गया।

अंचल के मरीजों के लिए जागी नई उम्मीद

सफल ट्रांसप्लांट के बाद बालक को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के लिए यह एक बड़ी सफलता है। अब तक इस तरह के इलाज के लिए मरीजों को इंदौर, मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और थका देने वाला होता था। जिले में ही इस सुविधा के उपलब्ध होने से मालवा अंचल के अन्य कैंसर मरीजों के लिए अब बेहतर और सुलभ उपचार की उम्मीद जगी है।

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