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ज्योतिष और वास्तु उपायों से पाएं शांत और सफल जीवन का मार्ग

कार्यालय हो या घर, वास्तु शास्त्र में दिशा और स्थान का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि सही दिशा में बैठने और रहने से व्यक्ति के व्यवहार, सोच और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। खासकर अग्निकोण को लेकर वास्तु में कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं, जिनका सीधा संबंध व्यक्ति के स्वभाव और क्रोध जैसी भावनाओं से जोड़ा जाता है।

 

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कार्यालय में अग्निकोण में बैठना क्यों माना जाता है गलत?

कार्यालयों में भी जो कर्मचारी अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में बैठते हैं, उनका स्वभाव आक्रामक होने लगता है। माना जाता है कि इस दिशा में अग्नि तत्व का प्रभाव अधिक होता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार में तेज़ी और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।

अगर बॉस का कमरा अग्निकोण में हो, तो कर्मचारियों पर अक्सर बॉस का गुस्सा उतरता है। ऐसे में वास्तुशास्त्र के अनुसार मालिक या उच्च पदस्थ व्यक्तियों को अग्निकोण की जगह नैऋत्य कोण यानी दक्षिण-पश्चिम दिशा में बैठकर कार्यालय की गतिविधियों का संचालन करना चाहिए।

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क्रोध नियंत्रण और वास्तु उपाय

यदि किसी व्यक्ति को बहुत अधिक क्रोध आता है और प्रयास करने के बाद भी वह नियंत्रित नहीं हो रहा हो, तो वास्तु के अनुसार कुछ उपाय बताए जाते हैं। कहा जाता है कि सोते समय सिर हमेशा पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए। सिरहाने की तरफ क्रिस्टल बॉल या फिटकरी का टुकड़ा रखने की भी सलाह दी जाती है।

जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में हो, वे मोती धारण कर सकते हैं। मोती को और प्रभावशाली बनाने के लिए सोमवार के दिन शुभ मुहूर्त में मोती के नीचे चांदी का अर्द्धचंद्र जड़वाकर धारण करने की भी परंपरा बताई जाती है, खासकर क्रोधी स्वभाव वाले व्यक्तियों के लिए।

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क्रोध कम करने के लिए दैनिक आदतें

वास्तु और ज्योतिष के अनुसार कार्यालय या घर के अग्निकोण में नहीं बैठना चाहिए। जब क्रोध आए, तो गुरु मंत्र का जप करना या अपने माता-पिता का स्मरण करना मानसिक शांति के लिए उपयोगी माना जाता है।

प्रतिदिन सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से तन और मन दोनों मजबूत होते हैं। इन्हें क्रोध जैसी भावनाओं पर नियंत्रण का प्रभावी उपाय माना गया है।

इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि जन्मकुंडली में जिस ग्रह का प्रभाव अधिक हो, उससे संबंधित देवी-देवता की आराधना करने से जीवन में संतुलन और मानसिक शांति बनी रहती है।

शास्त्रों में क्रोध और मानव स्वभाव

गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य के पतन के तीन मुख्य कारण बताए हैं—काम, क्रोध और लोभ। ये तीनों विकार व्यक्ति को गलत दिशा में ले जाते हैं और जीवन में असंतोष पैदा करते हैं।

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का उद्देश्य भी यही माना जाता है कि इन विकारों को कम करके व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाई जाए।

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