भस्मारती अनुमति के लिए गुजरात की महिला श्रद्धालु से 42 हजार हड़पे

गूगल से नंबर निकालकर किया था संपर्क, नंदी हाल से दर्शन कराने का दिया था झांसा
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन और भस्मारती के नाम पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ धोखाधड़ी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला गुजरात के वडोदरा की एक महिला श्रद्धालु का है, जिनसे भस्मारती बुकिंग और प्रोटोकॉल के नाम पर शातिर ठग ने 42 हजार रुपए ऐंठ लिए। महाकाल थाना पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है।
महाकाल पुलिस के मुताबिकवडोदरा (गुजरात) की योगेश्वर सोसायटी, मकरपुरा निवासी वीणा धनेरिया (44) ने शिकायत दर्ज कराई है। वह प्राइवेट जॉब करती हैं। 15 मई को वह अपनी दोस्त अल्पना पटेल के साथ महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आई थीं। भस्मारती बुकिंग के लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया, जहां उन्हें दीपक मिश्रा नामक व्यक्ति का मोबाइल नंबर (8770064451) मिला।
सेव मनी और प्रोटोकॉल के नाम पर बार-बार ट्रांसफर कराए रुपए
पहला ट्रांजेक्शन-आरोपी दीपक मिश्रा ने दोनों महिलाओं की भस्मारती बुकिंग के लिए 11,500 मांगे और पहचान पत्र की फोटो भेजने को कहा। महिला ने गूगल पे के जरिए रुपए भेज दिए।
दूसरा ट्रांजेक्शन- रात 9.30 बजे आरोपी ने दोबारा फोन कर कहा कि प्रोटोकॉल के तहत 10,000 और भेजने होंगे, जो बाद में रिफंड (सेव मनी) हो जाएंगे। महिला ने यह राशि भी भेज दी।
तीसरा ट्रांजेक्शन- एक घंटे बाद आरोपी ने कहा कि पेमेंट रिसीव नहीं हुआ है, दूसरे नंबर से भेजें। महिला ने वडोदरा में मौजूद अपने पति अमित पंड्या से कहकर उनके यूपीआई नंबर से फिर 10 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए।
चौथा ट्रांजेक्शन-अगले दिन आरोपी ने नंदी हॉल से भस्मारती कराने का झांसा देकर प्रोटोकॉल के नाम पर 10,500 और ऐंठ लिए।
मंदिर पहुंचने पर खुला ठगी का राज
रविवार सुबह दोनों सहेलियों को भस्मारती दर्शन करने थे, लेकिन उससे ठीक पहले आरोपी दीपक का फोन आया कि बुकिंग नहीं हो पाई है और आपका पेमेंट रिफंड किया जा रहा है। जब पीडि़ता ने महाकाल मंदिर पहुंचकर काउंटर पर जानकारी ली, तब पता चला कि वे ठगी का शिकार हो चुकी हैं। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल नंबर को ट्रेस कर उसकी लोकेशन का पता लगा रही है।
सप्ताह में दूसरा मामला
इससे पहले 13 मई को महाराष्ट्र के तीन श्रद्धालु शार्दुल काम्बले, तन्मय भालेकर और मानव गायकोड उज्जैन पहुंचे थे। उनसे आशुतोष शर्मा नामक व्यक्ति ने प्रोटोकॉल के तहत नंदीहॉल से दर्शन कराने के नाम पर 5,000 ले लिए। महाकाल पुलिस ने आशुतोष शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था, हालांकि आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
डेढ़ भर पहले हुआ था बड़ा खुलासा, फिर भी नहीं लग रही लगाम: करीब डेढ़ साल नवंबर २०२४ में महाकाल मंदिर में दर्शन के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। उस दौरान मंदिर के आउटसोर्स कर्मचारियों और बाहरी दलालों सहित कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मंदिर समिति ने भी भस्मारती दश्रन अनुमति नियमों में कड़े बदलाव किए हैं। इसके बावजूद मंदिर क्षेत्र में सक्रिय ठग बेखौफ होकर बाहरी राज्यों से आने वाले भोले-भाले श्रद्धालुओं को अपना शिकार बना रहे हैं।
दलालों की राह आसान कर रही भस्मारती की जटिल प्रक्रिया
भगवान महाकाल के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आने वाला हर दर्शनार्थी भस्मारती में शामिल होने की आस लिए होता है। उज्जैन आकर उसे पता चलता है कि अगले दिन भस्मारती की अनुमति लेना आसान नहीं है। ऐसे में वो दलालों को तलाशता है और ठगी का शिकार हो जाता है।
मंदिर में पंडे-पुजारियों के सहयोगी मोटी रकम लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनुमति हो जाने पर रुपए हजम नहीं तो वापस ले लो। इस मामले में फरियादी को रुपए रिटर्न नहीं हुए और हंगामा मच गया। हालांकि मंदिर समिति ने भस्मारती अनुमति को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है। जिसके तहत एक माह और तत्काल में एक दिन पहले बुकिंग की जा सकती है। लेकिन यह व्यवस्था ऐसी है कि लिंक खुलते ही 5-10 मिनट में सीटें फुल हो जाती है। जबकि प्रोटोकॉल अनुमति प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों से रात 9 तक भी चलती रहती है।









