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परशुराम कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज की साधारण सभा में जमकर चले लात-घूंसे, एफआईआर दर्ज नहीं

हंगामे के बीच अमित तिवारी अध्यक्ष घोषित, नई कार्यकारिणी जल्द गठित करने का ऐलान

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। परशुराम कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज की साधारण सभा में रविवार को जमकर हाथापाई हुई, लात-घूंसे बरसने लगे तो माधवनगर पुलिस को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा। हंगामे के बीच ही एक गुट ने अमित तिवारी को अध्यक्ष घोषित कर दिया। दूसरे गुट ने साधारण सभा स्थगित करने और बाद में चुनाव करने का ऐलान किया है। यह पक्ष थाने पर भी पहुंचा लेकिन एफआईआर लिखाने से इंकार कर दिया।

कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के उज्जैन में करीब 800 परिवार हैं। सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए समाज ने परशुराम कान्यकुब्ज ब्राह्मण समिति का गठन कर रखा है। समिति में सदस्य बनने के नियम भी तय किए गए हैं। 11 हजार रुपए देने वाला आजीवन और 1200 रुपए देने वाले वार्षिक सदस्य होते हैं। समिति के 119 आजीवन सदस्य हैं। इन लोगों ने करीब ढाई साल पहले यूपी के उरई के रहने वाले ईश्वरचंद्र दुबे को अध्यक्ष चुना था।

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दुबे का तीन साल का कार्यकाल समाप्ति (3जून) की ओर है और इसी को बढ़ाने के लिए उनकी अध्यक्षता में अंतिम साधारण सभा रविवार शाम माधवनगर पोस्ट ऑफिस के पास स्थित तिवारी कॉलोनी में संस्था कार्यालय में रखी गई थी। बैठक में वित्तीय वर्ष की आय-व्यय का ब्योरा और साल भर की गतिविधि की जानकारी दी जा रही थी। इसी बीच दूसरे पक्ष के लोग वरिष्ठ कांग्रेस नेता रवि शुक्ला, भाजपा पार्षद रामेश्वर दुबे के नेतृत्व में पहुंचे और आपत्ति ली। करीब 200 से ज्यादा की संख्या में आए समाजजन ने मीटिंग स्थल पर लगे कैमरों पर भी नाराजगी जाहिर की और उन्हें हटाने की मांग की। पहले गुट के ईश्वरचंद दुबे और जगदीश शुक्ला ने कैमरे हटाने से इंकार किया तो विवाद भड़क गया और दूसरे गुट ने हाथापाई शुरू कर दी।

हंगामा इतना बढ़ा कि माधवनगर थाने से पुलिस बुलानी पड़ी। ताबड़तोड़ फोर्स पहुंचा और दोनों पक्षों को अलग-अलग किया। हंगामे के बाद दुबे ने बैठक स्थगित करने का ऐलान कर दिया। प्रचार सचिव योगेश शुक्ला ने बताया हंगामे के कारण बैठक स्थगित की गई है। दुबे थाने भी पहुंचे पर रिपोर्ट लिखाने से इनकार कर दिया।

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दूसरे पक्ष ने मंच पर जमाया कब्जा, नया अध्यक्ष बनाया
पहले पक्ष के बाहर निकलते ही दूसरे पक्ष ने मंच पर कब्जा जमा लिया और कंस्ट्रक्शन कारोबारी अमित तिवारी को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया। उनकी नियुक्ति का प्रस्ताव पूर्व अध्यक्ष एवं ट्रस्टी अजय पांडे ने रखा। समर्थन योगेंद्र शुक्ल और विष्णु दीक्षित ने किया। प्रस्ताव को उपस्थितजन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। कार्यक्रम को रवि शुक्ला, रामेश्वर दुबे, कल्पना तिवारी, कृष्णा त्रिपाठी ने संबोधित किया।

नए अध्यक्ष ने धर्मशाला निर्माण की घोषणा की। मुल्लापुरा स्थित समाज की जमीन पर इसके निर्माण का ऐलान किया गया। इस गुट ने दावा किया कि ईश्वरचंद दुबे को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है, क्योंकि वह कान्यकुब्ज ब्राह्मण नहीं है। पार्षद रामेश्वर दुबे ने बताया कि दुबे अलोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहे थे। वह कान्यकुब्ज ब्राह्मण नहीं है। फिर भी उनको अध्यक्ष चुन लिया गया था। वह अपने लोगों को सदस्य बना रहे थे, ताकि उनकी सत्ता को चुनौती नहीं दी जा सके। ऐसे में समाज ने बहुमत से उन्हें हटा दिया। इस संबंध में रवि शुक्ला से चर्चा की कोशिश की गई, पर बात नहीं हो पाई।

अध्यक्ष ईश्वरचंद दुबे से सीधी बात

Q- आप कान्यकुब्ज ब्राह्मण नहीं है, फिर अध्यक्ष कैसे बन गए?
A- मैं उत्तरप्रदेश के उरई का कान्यकुब्ज ब्राह्मण हूं। वहां से यह पता किया जा सकता है।

Q- आरोप है कि आप अपने लोगों को ही सदस्य बना रहे थे?
A- ऐसा नहीं है। 11 हजार रुपए देने वाला आजीवन और 1200 रुपए देने वाला वार्षिक सदस्य बन सकता है। सदस्यता समाज के हर समाजजन के लिए खुली है।

Q- फिर हंगामा क्यों हुआ ?
A- साधारण सभा में हंगामा करने वाले लोग रजिस्टर्ड संस्था परशुराम कान्यकुब्ज ब्राह्मण समिति के सदस्य नहीं है। वह गैरकानूनी तरीके से सभा में आए, हंगामा किया, मारपीट की।

Q-आपने पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं की?
A- समाज का मामला है, समाज के बीच ही निपटारा होना चाहिए। मैंने अपने कार्यकाल में समाज हित के कई कार्य किए। 25 आजीवन सदस्य की संख्या बढ़ाकर 119 की। अखिल भारतीय स्तर के युवक-युवती परिचय सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान समारोह जैसे आयोजन कराए।

एक पक्ष थाने आया था, आवेदन दे रहे थे, रिपोर्ट दर्ज नहीं करा रहे थे
तिवारी कॉलोनी में विवाद के बाद फोर्स भेजा गया था। एक पक्ष के लोग आवेदन लेकर आए थे। उनसे कहा था आवेदन मत दीजिए, एफआईआर दर्ज कराइए। उन्होंने मना कर दिया। अगर वह एफआईआर दर्ज कराते हैं तो वह कर लेंगे।
-गजेंद्र पचौरिया, टीआई माधवनगर थाना

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