सरकार 17 लाख टन यूरिया आयात की तैयारी में

खरीफ के इस चालू सीजन में किसानों के लिए खाद की किल्लत पूरी तरह खत्म होने जा रही है। केंद्र सरकार ने सोमवार को साफ किया कि देश में उर्वरक की सप्लाई व्यवस्था को और तगड़ा करने के लिए करीब 17 लाख टन यूरिया के इंपोर्ट प्रोसेस को आखिरी रूप दिया जा रहा है। एक हाई-लेवल मीटिंग के दौरान फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि इस बार खरीफ फसलों के लिए खाद की कोई कमी नहीं होने वाली है, क्योंकि देश के गोदामों में फर्टिलाइजर का बंपर स्टॉक पहले से ही मेंटेन है।
अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कृषि मंत्रालय ने इस पूरे खरीफ सीजन के दौरान करीब 383.9 लाख टन खाद की रिक्वायरमेंट का अंदाजा लगाया है। राहत की बात यह है कि इस मांग के मुकाबले वर्तमान में देश के पास 196.65 लाख टन का भारी-भरकम स्टॉक पहले से सेफ है, जो कि सामान्य से काफी बेहतर स्थिति है। अभी तक देश के किसान अपनी कुल जरूरत का लगभग 37 फीसदी यानी 102.78 लाख टन केमिकल फर्टिलाइजर खरीद भी चुके हैं। वक्त रहते सरकारी प्लानिंग और एडवांस में स्टॉक जुटाने की वजह से ही यह स्थिति बनी है।
इस बीच एक सरकारी फर्टिलाइजर कंपनी द्वारा 17 लाख टन यूरिया मंगाने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर के जवाब में दुनिया भर की बड़ी कंपनियों ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाते हुए 60 लाख टन से ज्यादा की बोलियां लगा दीं। इस पूरी डील में सबसे कम बोली करीब 445 डॉलर प्रति टन के आसपास आई है। एक दिलचस्प ट्रेंड यह भी देखने को मिल रहा है कि केमिकल फर्टिलाइजर के साथ-साथ अब देश में ऑर्गेनिक यानी जैविक खाद का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। रिकॉर्ड बताते हैं कि किसानों ने अब तक 11.82 लाख टन जैविक खाद खरीदी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 3.31 लाख टन पर सिमटा हुआ था। साफ है कि देश का अन्नदाता अब धीरे-धीरे जैविक विकल्पों की तरफ शिफ्ट हो रहा है।
पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव और जियोपॉलिटिकल संकट के बाद भी भारत ने अपनी फर्टिलाइजर सिक्योरिटी में कोई सेंध नहीं लगने दी है। वैश्विक उठापटक के बीच भारत ने होशियारी दिखाते हुए 50 लाख टन से ज्यादा यूरिया और पीएंडके (फास्फेटिक और पोटाश) खाद का बैकअप तैयार कर लिया है। इसके लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, रूस, जॉर्जिया, नाइजीरिया, मिस्र और नीदरलैंड जैसे देशों से यूरिया का इंतजाम किया गया है, जबकि डीएपी (DAP) की सप्लाई के लिए रूस, मोरक्को, अमेरिका, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे देशों से डील पक्की की गई है।
वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संवेदनशील समुद्री रूट पर भारत के 16 मालवाहक जहाज मुस्तैद हैं। इनमें से आठ जहाजों पर यूरिया, चार पर डीएपी, तीन पर सल्फर और एक जहाज पर अमोनिया लोड है। सरकार घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट के हर उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रख रही है। फर्टिलाइजर कंपनियों के सब्सिडी बिलों को भी हर हफ्ते क्लियर किया जा रहा है और इसके लिए फंड की कोई कमी नहीं है।
भारत में पिछले कुछ सालों के भीतर यूरिया के डोमेस्टिक प्रोडक्शन ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। साल 2014-15 में जहां देश में सिर्फ 225 लाख टन यूरिया बनता था, वहीं साल 2023-24 में यह ग्राफ बढ़कर 314.07 लाख टन तक पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए 100 लाख टन से ज्यादा यूरिया बाहर से भी मंगाना पड़ा था। इसके अलावा पीएंडके खाद का प्रोडक्शन भी 2014-15 के 159.54 लाख टन से उछलकर अब 211.22 लाख टन के स्तर पर आ चुका है। सरकार का दावा है कि देश की फर्टिलाइजर व्यवस्था पूरी तरह से सुरक्षित और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है।









