Advertisement

बच्चों में दिखें ये 6 लक्षण तो तुरंत हो जाएं सावधान

अक्सर माता-पिता बच्चों के गुस्से को जिद, नखरे या शरारत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार बच्चे अपने मन की परेशानी, डर, तनाव या किसी के गलत व्यवहार को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते और उनका गुस्सा ही उनकी भावनाओं का संकेत बन जाता है। यदि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे या गुस्से के साथ कुछ खास लक्षण भी नजर आने लगें, तो इसे सामान्य बात मानकर टालना सही नहीं है। कई बार यह किसी मानसिक दबाव या अंदरूनी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है।

 

Advertisement

बच्चों का गुस्सा हो सकता है मदद की पुकार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अनुसार, बच्चों का हर गुस्सा केवल जिद नहीं होता। कई मामलों में यह उनकी खामोश मदद की पुकार भी हो सकती है। यदि बच्चे के व्यवहार, स्वभाव या दिनचर्या में अचानक बदलाव आने लगे, तो माता-पिता को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। मानसिक तनाव, चिंता या अवसाद जैसे शुरुआती संकेत बच्चों में अक्सर व्यवहार और शारीरिक लक्षणों के रूप में सामने आते हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को नहीं पहचाना गया, तो आगे चलकर समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

ये 6 संकेत दिखें तो रहें सावधान

विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चा लगातार गुस्सा, चिड़चिड़ापन या अन्य असामान्य व्यवहार दिखा रहा है, तो उस पर ध्यान देना जरूरी है।

Advertisement

1. लगातार निराश रहना

यदि बच्चा बार-बार हताश महसूस करता है, उत्साहहीन रहता है या पहले जिन गतिविधियों में रुचि लेता था, उनमें दिलचस्पी कम होने लगे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

2. सिर या पेट दर्द की शिकायत

बिना किसी स्पष्ट शारीरिक कारण के यदि बच्चा बार-बार सिरदर्द या पेटदर्द की शिकायत करता है, तो इसके पीछे मानसिक तनाव भी हो सकता है।

Advertisement

3. चिड़चिड़ापन बढ़ जाना

छोटी-छोटी बातों पर झुंझलाना, जल्दी नाराज होना या सामान्य परिस्थितियों में भी असहज प्रतिक्रिया देना मानसिक दबाव का संकेत हो सकता है।

4. अचानक मूड बदलना

कुछ ही समय में बहुत खुश से बेहद उदास या गुस्सैल हो जाना भी भावनात्मक असंतुलन की ओर इशारा करता है।

5. हर बात पर गुस्सा करना

यदि बच्चा मामूली बातों पर भी क्रोधित हो जाता है, बहस करता है या झगड़ालू व्यवहार दिखाने लगता है, तो इसे सामान्य जिद मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

6. व्यवहार में अचानक बदलाव

बच्चे का लोगों से दूरी बनाना, अकेले रहना पसंद करना या पहले की तुलना में बिल्कुल अलग व्यवहार करना भी किसी परेशानी का संकेत हो सकता है।

माता-पिता को क्या करना चाहिए

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों के ऐसे व्यवहार को केवल शरारत या नखरे समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार इसके पीछे विद्यालय का दबाव, दोस्तों के साथ विवाद, पारिवारिक तनाव या अकेलेपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर दें। जरूरत महसूस होने पर बाल मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता की सहायता लेने से भी हिचकिचाना नहीं चाहिए।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता बच्चों के लिए केवल अभिभावक ही नहीं, बल्कि अच्छे मित्र भी बनें। हर छोटी बात पर डांटने या टोकने के बजाय उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। यदि ऊपर बताए गए लक्षण लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें हल्के में न लें। समय पर पहचान और सही मार्गदर्शन से बच्चों को मानसिक और भावनात्मक समस्याओं से बचाया जा सकता है तथा उनका आत्मविश्वास भी मजबूत बनाया जा सकता है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें