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पीएम मोदी ने मैक्रों को भेंट की खास कलमकारी महाभारत पेंटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फ्रांस दौरे के दौरान वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध कला, शिल्पकला और पारंपरिक कौशल से रूबरू कराया। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को भारत की प्राचीन परंपराओं से जुड़े विशेष हस्तशिल्प उपहार स्वरूप भेंट किए। प्रधानमंत्री के इन उपहारों का उद्देश्य भारतीय कारीगरों के सदियों पुराने कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करना है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने जी 7 (G7) सम्मेलन के नेताओं और स्लोवाकिया के शीर्ष नेतृत्व को भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त अनूठे उत्पाद भेंट किए।

 

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राष्ट्रपति मैक्रों को कलमकारी पेंटिंग और पत्नी को पोचमपल्ली स्टोल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की। पारंपरिक कलमकारी शैली में रची गई इस अनुपम कलाकृति को पूर्ण करने में कुशल कारीगरों को लगभग 6 महीने का लंबा समय लगा है। इस पेंटिंग में महाभारत के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से धर्म, न्याय और नैतिक मूल्यों को उकेरा गया है। इसका मुख्य आकर्षण श्रीमद्भगवद्गीता का वह दृश्य है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्तव्य और आत्मसंयम का उपदेश दे रहे हैं।

वहीं, फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिजिट मैक्रों को तेलंगाना का प्रसिद्ध पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार में दिया गया। यह स्टोल जटिल ‘इकत रेजिस्ट-डाइंग’ तकनीक से हाथ से बुना जाता है, जो अपनी ज्यामितीय (ज्यामेट्रिक) और पुष्पीय डिजाइनों तथा उत्कृष्ट बनावट के लिए जाना जाता है। वस्त्र शिल्प में फ्रांस की गहरी रुचि के चलते यह उपहार अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है।

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जी 7 (G-7) नेताओं को मिले भारत के प्राकृतिक व सांस्कृतिक उत्पाद

प्रधानमंत्री ने जी 7 शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं को भारत के औषधीय, प्राकृतिक और वस्त्र विज्ञान से जुड़े निम्नलिखित उपहार दिए:

  • नागोरी अश्वगंधा: राजस्थान के नागौर जिले की शुष्क जलवायु में उगने वाली इस उच्च गुणवत्ता वाली औषधीय जड़ी-बूटी को जीआई टैग प्राप्त है, जो ग्रामीण आजीविका का बड़ा आधार है।

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  • रंबन हनी (शहद): जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में हिमालयी वनस्पतियों और जंगली फूलों के रस से पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाला यह शहद अपने विशिष्ट स्वाद और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट के लिए प्रसिद्ध है।

  • बनारसी सिल्क स्टोल: वाराणसी के बुनकरों द्वारा महीन रेशम और जरी की बारीक कारीगरी से तैयार यह जीआई टैग प्राप्त स्टोल भारतीय वस्त्र कला की सदियों पुरानी विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।

स्लोवाकिया के नेताओं को दिए गए ऐतिहासिक व पारंपरिक उपहार

स्लोवाकिया के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के शीर्ष नेताओं को भारतीय इतिहास और धातु शिल्प से जुड़े उपहार सौंपे:

  • राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी: इन्हें प्रतापगढ़ की दुर्लभ थेवा तकनीक से निर्मित सोने और कांच के थेवा मोटिफ कफलिंक, औरंगाबाद की जीआई टैग प्राप्त हिमरू सिल्क टाई व पॉकेट स्क्वायर तथा छत्तीसगढ़-ओडिशा के आदिवासी कारीगरों द्वारा लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग तकनीक से तैयार पीतल का डोकरा एंटीलोप (हिरण) सेट भेंट किया गया। यह एंटीलोप सेट स्लोवाकिया के राष्ट्रीय जीव ‘टाट्रा चामोइस’ के साथ एक सांस्कृतिक जुड़ाव प्रदर्शित करता है।

  • स्पीकर रिचर्ड रासी: इन्हें चिकित्सा और शल्यचिकित्सा (सर्जरी) के प्राचीन भारतीय ज्ञान से समृद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ ‘सुश्रुत संहिता’ और ‘चरक संहिता’ की प्रतियां भेंट की गईं, जिसमें प्राचीन राइनोप्लास्टी जैसी तकनीकों का विवरण है।

  • प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको: इन्हें कश्मीर घाटी (श्रीनगर) के कुशल कारीगरों द्वारा शुद्ध प्राकृतिक रेशम से हाथ से बुना गया कश्मीरी सिल्क कारपेट भेंट किया गया, जो अपने जटिल पैस्ले और बेल-बूटों के डिजाइनों के लिए दुनिया भर में विख्यात है।

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