Advertisement

बिना डांटे बच्चों से कराएं होमवर्क, अपनाएं ये 4 टिप्स

गर्मियों की छुट्टियां बच्चों के लिए मौज-मस्ती, नानी के घर जाने और ढेर सारी शरारतों का वक्त होती हैं। लेकिन जैसे ही छुट्टियों का आधा समय बीत जाता है, हर घर में एक जाना-माना तनाव दस्तक देने लगता है—’समर वेकेशन होमवर्क’। छुट्टियों की शुरुआत में जिस होमवर्क को बच्चे ‘कल कर लेंगे’ कहकर टालते रहते हैं, वह जून का महीना आते-आते माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाता है। रोज की डांट-फटकार और रोने-धोने से अगर आपके घर का माहौल भी तनावपूर्ण हो गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। रिलेशनशिप और चाइल्ड एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ स्मार्ट पेरेंटिंग हैक्स की मदद से आप बच्चों को बिना किसी मानसिक दबाव के, खेल-खेल में उनका स्कूल टास्क पूरा करवा सकते हैं।

 

Advertisement

बच्चों का होमवर्क आसान बनाने वाले 4 जादुई पेरेंटिंग हैक्स

बच्चों को जबरन पढ़ाने बिठाने के बजाय अगर उनके दृष्टिकोण से चीजों को बदला जाए, तो पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं रहेगी। इसके लिए आप निम्नलिखित रणनीतियों को अपना सकते हैं:

1. ’होमवर्क टाइम’ को बनाएं ‘चैलेंज गेम’

बच्चों को सीधे और कड़े लहजे में यह बोलने के बजाय कि “चलो, रोना बंद करो और पढ़ने बैठो”, पूरे टास्क को एक खेल या चुनौती में बदल दें।

Advertisement
  • कैसे अपनाएं: टेबल पर एक टाइमर या मोबाइल में स्टॉपवॉच सेट करें और बच्चे से कहें, “चलो देखते हैं कि क्या तुम घड़ी की सुई घूमने से पहले 20 मिनट में गणित के ये 5 सवाल सही हल कर सकते हो?”

  • मनोवैज्ञानिक फायदा: बच्चे स्वभाव से प्रतिस्पर्धी (कॉम्पिटिटिव) होते हैं। जब उन्हें कोई स्पष्ट चैलेंज मिलता है, तो उनका दिमाग उसे बोझ समझने के बजाय एक रोमांचक खेल की तरह लेता है और वे काम में जुट जाते हैं।

    Advertisement

2. रिवॉर्ड सिस्टम और ‘स्टार चार्ट’ का इस्तेमाल

बिना किसी लालच या प्रोत्साहन के लगातार काम करना बच्चों को थका देता है। उनके काम को सराहने के लिए एक विजुअल रिवॉर्ड सिस्टम तैयार करें।

  • कैसे अपनाएं: घर की दीवार या बच्चे के स्टडी रूम में एक ‘स्टार चार्ट’ लगाएं। हर एक विषय का टास्क पूरा होने पर उन्हें चार्ट पर एक चमकीला स्टार दें।

  • नियम तय करें: बच्चे के साथ मिलकर नियम बनाएं कि “अगर इस हफ्ते तुम्हें कुल 5 स्टार मिले, तो वीकेंड पर हम तुम्हारी पसंद की मूवी देखने जाएंगे या आइसक्रीम पार्लर चलेंगे।” इससे बच्चों में समय पर काम खत्म करने का मोटिवेशन (प्रेरणा) बना रहता है।

3. पढ़ाई को प्रैक्टिकल और क्रिएटिव बनाएं

केवल किताब खोलकर रट्टा मारना हर उम्र के बच्चे को बोरिंग और थकाऊ लगता है। इसलिए होमवर्क को उनकी असल जिंदगी और व्यावहारिक दुनिया से जोड़ें।

  • कैसे अपनाएं: अगर साइंस (विज्ञान) या ईवीएस (EVS) का कोई प्रोजेक्ट है, तो उन्हें रटाने के बजाय किचन में ले जाकर पौधों, मसालों या पानी के वाष्पीकरण का प्रैक्टिकल समझाएं। यदि अंग्रेजी या हिंदी की राइटिंग सुधारनी है, तो उन्हें किसी बोरिंग चैप्टर की नकल करने के बजाय दादा-दादी, नाना-नानी या अपने बेस्ट फ्रेंड को एक मजेदार ‘सीक्रेट लेटर’ (गुप्त पत्र) लिखने के लिए कहें।

4. ’बॉडी डबलिंग’ तकनीक (साथ बैठकर काम करना)

अक्सर बच्चे तब सबसे ज्यादा चिढ़ते हैं जब वे देखते हैं कि पूरा घर आराम से टीवी देख रहा है, बातें कर रहा है या फोन चला रहा है और सिर्फ उन्हें अकेले कमरे में पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

  • कैसे अपनाएं: घर के किसी शांत कोने को एक ‘वर्क स्टेशन’ का रूप दें। जब बच्चा अपना समर वेकेशन होमवर्क कर रहा हो, ठीक उसी समय आप भी उसके सामने बैठकर अपने ऑफिस की फाइलें देखें, घर का बजट बनाएं या कोई ज्ञानवर्धक किताब पढ़ें।

  • फायदा: इस मनोवैज्ञानिक तकनीक को ‘बॉडी डबलिंग’ कहते हैं। आपको अपने साथ गंभीरता से काम करते देख बच्चे को अकेलापन या भेदभाव महसूस नहीं होता और उसका ध्यान (फोकस) पूरी तरह पढ़ाई पर केंद्रित रहता है।

पेरेंट्स के लिए एक ज़रूरी टिप

माता-पिता को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि वेकेशन होमवर्क बच्चों की सीख, मानसिक विकास और क्रिएटिविटी को बढ़ाने के लिए तैयार किया जाता है, यह माता-पिता की योग्यता का टेस्ट नहीं है। इसलिए उनका सारा काम खुद करने या उन्हें हर वक्त डांटने के बजाय सिर्फ उनके ‘गाइड’ (मार्गदर्शक) बनें। थोड़ा सब्र रखें, उनके छोटे-छोटे प्रयासों की तारीफ करें और घर के माहौल को खुनुमा बनाए रखें ताकि बच्चों की छुट्टियां ‘स्ट्रेस-फ्री’ और हैप्पी रह सकें।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें