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अफगानिस्तान में महिलाओं का बढ़ता कारोबार: तालिबान शासन के बीच बिजनेस लाइसेंस में 10 गुना वृद्धि


अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर दुनिया के सबसे कड़े प्रतिबंध लागू हैं। लेकिन इसी माहौल में महिलाओं का उद्यमिता की ओर रुझान तेजी से बढ़ा है। आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय अलगाव से जूझ रहे इस देश में तालिबान प्रशासन ने महिलाओं को सीमित दायरे में कारोबार करने की अनुमति दी है। नतीजतन, पिछले पांच वर्षों में महिलाओं को जारी किए जाने वाले बिजनेस लाइसेंस की संख्या 10 गुना बढ़ गई है।

 

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अफगान कॉमर्स एंड इंडस्ट्री चैंबर के मुताबिक देश में 10,000 से अधिक महिलाओं के पास बिजनेस लाइसेंस हैं। वहीं विश्व बैंक का अनुमान है कि करीब 1.2 लाख महिलाएं बिना लाइसेंस के भी छोटे-मोटे कारोबार चला रही हैं। इनमें गलीचा बुनाई, कॉस्मेटिक्स, हस्तशिल्प, मधुमक्खी पालन और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।


सिर्फ 7% महिलाएं काम कर रही हैं

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में अब भी केवल 7% महिलाएं किसी न किसी रूप में काम कर रही हैं। वकील, इंजीनियर या प्रोफेसर बनने का सपना देखने वाली कई महिलाएं अब उन्हीं सीमित क्षेत्रों में काम करने को मजबूर हैं जिन्हें तालिबान शासन स्वीकार करता है।

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काम करने वाली महिलाओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जून में मोरल पुलिस द्वारा दर्जनों महिलाओं की गिरफ्तारी और प्रताड़ना के विरोध में जनता का आक्रोश भी सामने आ चुका है।


क्या-क्या नहीं कर सकतीं अफगान महिलाएं?

तालिबान शासन में महिलाओं पर कई पाबंदियां लागू हैं जो उनके व्यापार को सीधे प्रभावित करती हैं। महिलाएं ब्यूटी सेलून नहीं चला सकतीं, नर्सिंग की पढ़ाई नहीं कर सकतीं, पुरुष ग्राहकों या बैंक अधिकारियों से सीधे बात नहीं कर सकतीं और सप्लायरों से बिना पुरुष गवाह के संवाद नहीं कर सकतीं।

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बाधाओं के बावजूद सफलता की कहानियां

इन कठिन हालातों में भी कुछ महिलाओं ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 19 वर्षीय अज़ीज़ी ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मदद से गलीचा निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। उनका सपना था बड़ी कंपनी में नौकरी करना, पर आज वे अपना कारोबार चला रही हैं। वहीं 21 वर्षीय रोकिया रेज़ाई, जो कभी मेडिकल इंजीनियर बनना चाहती थीं, अब साबुन निर्माण का कारोबार चला रही हैं।


व्यापार की राह भी आसान नहीं

कारोबार की इजाजत मिली जरूर है, लेकिन राह कठिन है। व्यावसायिक यात्राओं के लिए पिता, भाई या पति पर निर्भर रहना पड़ता है। मधुमक्खी पालन करने वाली गोंचा करीमी बताती हैं कि कई बार उन्हें शहर से बाहर जाने के लिए पुरुषों के कपड़े पहनने पड़ते हैं।

आलोचकों का कहना है कि महिलाओं को कारोबार की अनुमति देना सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन शिक्षा, रोजगार और स्वतंत्र आवाजाही पर लगी पाबंदियों के बीच यह राहत पर्याप्त नहीं।

अफगान महिलाएं असाधारण दृढ़ता के साथ अपना रास्ता बना रही हैं — पर हर कदम पर प्रतिबंधों की दीवार उनके सामने खड़ी है।

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