यूं तो लहरा रही सोयाबीन, मगर इल्लियों का प्रकोप बढ़ा किसान कर रहे कीटनाशक का छिडक़ाव

सुमित कुमार उज्जैन। जिले में हुई पर्याप्त बारिश के बाद खेतों में सोयाबीन फसल अच्छी स्थिति में नजर आ रही है। पौधों की बढ़वार बेहतर होने से किसानों को इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर थमने से कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन फसल पर इल्लियों का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ी है और वे फसल को बचाने के लिए कीटनाशकों का छिडक़ाव कर रहे हैं।
किसानों के अनुसार पर्याप्त नमी मिलने से सोयाबीन की फसल में अच्छी बढ़वार हुई है। कई खेतों में पौधों की ऊंचाई करीब 3 से साढ़े 3 फीट तक पहुंच गई है। फसल की स्थिति देखकर किसान इस बार बंपर उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बेहतर उत्पादन के लिए किसान फसल में कीटनाशक के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के टॉनिक का भी उपयोग हो रहे हैं।
हालांकि, फसल की अच्छी बढ़वार के साथ मौसम को लेकर भी किसानों की चिंता बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश होती है या तेज हवाएं चलती हैं तो अधिक ऊंचाई वाली सोयाबीन की फसल के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, यदि मौसम सामान्य रहा और फसल को जरूरत के मुताबिक नमी मिलती रही तो इस वर्ष उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है।
सोयाबीन बचाने के लिए खेत की निगरानी जरूरी – कृषि विभाग
बारिश के बीच सोयाबीन की फसल को सुरक्षित रखने के लिए किसानों को खेत में जल निकासी के साथ कीट प्रकोप पर भी लगातार नजर रखनी होगी। कृषि विभाग ने सलाह दी है कि खेत में तीन दिन से अधिक पानी जमा न रहने दें। लंबे समय तक जलभराव रहने से सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
इल्लियों से यू बचें
घनी फसल में गर्डल बीटल (रिंग कटर) के प्रकोप की आशंका भी रहती है।
तने पर दो रिंग दिखाई देने या पत्तियां मुरझाकर लटकने लगें तो प्रभावित हिस्से को शुरुआती अवस्था में ही तोडक़र खेत से बाहर कर दें।
इल्लियों की स्थिति जानने के लिए पौधों को हिलाकर नियमित रूप से फसल की निगरानी करें।
यदि प्रति वर्ग मीटर 3 से 4 इल्लियां दिखाई दें तो तत्काल कीट नियंत्रण के उपाय करना जरूरी है।
किसान प्राकृतिक तरीके से भी इल्लियों और अन्य कीटों की संख्या कम कर सकते हैं। इसके लिए खेत में टी आकार के बर्ड पर्चेस लगाए जा सकते हैं। इन पर बैठने वाले पक्षी इल्लियों और अन्य कीटों को खाकर फसल को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और फसल में किसी तरह की समस्या दिखाई देने पर क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र, उज्जैन से आवश्यक सलाह लेने की अपील की है।









