महाकाल मंदिर की दान राशि में नहीं हो सकती गड़बड़ी, बिना जेब के कपड़े पहनकर गिनते हैं नोट

वित्तीय वर्ष में आया 79.15 करोड़ का रिकॉर्डतोड़ दान, सीसीटीवी कैमरों और अधिकारियों की कड़ी निगरानी में खुलती हैं पेटियां

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। अयोध्या में श्रीराम मंदिर में दान में गड़बड़ी को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का दौर चल रहा है। इसी बीच प्रदेश सरकार ने महाकाल मंदिर सहित प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थल पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में सर्वाधिक दान राशि प्राप्त करने वाले श्री महाकालेश्वर मंदिर में पहले से ही इतनी सतर्कता बरती जाती है कि दान राशि गिनने वाले कर्मचारी भी बिना जेब के कपड़े पहनकर सीसीटीवी की निगरानी में काम करते हैं।
प्रशासन के अनुसार महाकाल मंदिर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 95 दान पेटियां (हुंडी) स्थापित हैं, जहां श्रद्धालु नकद दान करते हैं। नकद के अलावा श्रद्धालुओं के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है जिसके माध्यम से लोग सीधे मंदिर समिति के बैंक खाते में ऑनलाइन दान जमा कर रहे हैं।
मंदिर प्रशासन ने दान की गिनती के लिए बेहद सुरक्षित और जवाबदेह सिस्टम तैयार किया है। हर सप्ताह मंदिर परिसर की सभी दानपेटियों को खोला जाता है। इन्हें बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीधे गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य उच्च अधिकारियों की सीधी मौजूदगी में ही इन पेटियों को खोला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दान की गणना की पूरी फोटोग्राफी करवाई जाती है और हर गतिविधि सीसीटीवी कैमरों (तीसरी आंख) की सख्त निगरानी में संपन्न होती है।
नोट गिनने वाले कर्मचारियों के लिए है कड़ा प्रोटोकाल
मंदिर समिति ने दान की गिनती में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए कर्मचारियों पर पहले से ही कड़े नियम लागू किए हैं। कर्मचारियों को मंदिर समिति द्वारा तैयार किए गए बिना जेब वाले कपड़े पहनने होते हैं। इनमें कहीं और भी कुछ छिपाने की गुंजाइश नहीं होती। पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही किसी भी कर्मचारी को गणना कक्ष के अंदर प्रवेश की अनुमति दी जाती है।
महाकाल मंदिर में दान राशि भी रिकॉर्डतोड़
मंदिर समिति को इस वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 30 मार्च 2026) में करीब 79.15 करोड़ रुपए की दान राशि मिली है जो कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 28 करोड़ रुपए अधिक है। यह नकद राशि का रिकॉर्ड है। दान मेें मिलने वाला सोने-चांदी व अन्य धातु के जेवरात और अन्य सामग्री इसमें शामिल नहीं है। इनका मूल्य भी करोड़ों रुपए में हैं।
महाकाल लोक के बाद तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या: गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था, जिसके बाद से यहाँ आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में भारी उछाल आया है। पहले जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन २0 से 50 हजार के बीच श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
इस वर्ष कहां से कितना दान
दान पेटियों से – 62 करोड़
मनी ऑर्डर से – 1.23 लाख
नकद काउंटर – 5.50 करोड़
ऑनलाइन दान – 3.60 करोड़
गुप्त दान – 4.65 करोड़
अन्नक्षेत्र से 3.38 करोड़
कुल 79.15 करोड़
इनका कहना: महाकाल मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में शत-प्रतिशत पारदर्शिता बरती जाती है और इसकी गणना व पेटियां खोलते वक्त तय किए गए कड़े प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन होता है।
– आशीष फलवाडिय़ा
सहायक प्रशासक









